सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में साफ कर दिया है कि Bar Council of India (BCI) को कानून के छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि BCI का अधिकार क्षेत्र केवल उन्हीं लोगों पर लागू होता है जो बतौर वकील रजिस्टर हो चुके हैं।
कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
चीफ जस्टिस Surya Kant, जस्टिस Joymalya Bagchi और जस्टिस V Mohana की बेंच ने Advocates Act, 1961 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि एक नियामक संस्था के तौर पर BCI केवल वकीलों के कामकाज को नियंत्रित कर सकती है, न कि शैक्षणिक संस्थानों के छात्रों के व्यवहार को।
NALSAR विवाद का असर
यह फैसला 2026 में NALSAR University of Law में हुए विवाद के बाद आया है, जहां Bar Council ने कैंपस प्रदर्शन के बाद छात्रों के एनरोलमेंट को रोकने की कोशिश की थी। कोर्ट ने BCI के उस हस्तक्षेप को अनुचित करार देते हुए खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश ने साफ कहा कि कैंपस की आंतरिक शांति और अनुशासन का मुद्दा पूरी तरह से यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन के अधिकार क्षेत्र में आता है।
भविष्य के लिए दिशा-निर्देश
इस फैसले के साथ ही कोर्ट ने BCI के कामकाज पर भी लगाम कस दी है। अब भविष्य में BCI को कोई भी बड़ा नीतिगत फैसला लेने से पहले Attorney General for India और Solicitor General से सलाह-मशविरा करना होगा। यह फैसला लॉ स्कूलों की स्वायत्तता को सुरक्षित करने के साथ-साथ नियामक संस्था की शक्तियों की सीमा भी तय करता है।
