सुप्रीम कोर्ट ने दलबदल कानून के उल्लंघन के मामले में MLA दानम नागेंद्र की अयोग्यता को बरकरार रखा है। BRS सदस्य रहते हुए कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ना उन्हें महंगा पड़ा है, जिसके बाद खैरताबाद सीट पर अब उपचुनाव की राह साफ हो गई है।
कानूनी मोहर और फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना के खैरताबाद से विधायक दानम नागेंद्र की अयोग्यता पर अंतिम मुहर लगा दी है। जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने नागेंद्र की उस याचिका को सुनने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने अपनी सदस्यता रद्द करने के तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। इस फैसले के साथ ही उनकी विधानसभा सदस्यता का अंत हो गया है और दलबदल विरोधी नियमों (Anti-Defection Laws) का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया गया है।
विवाद की जड़: 'पार्टी-हॉपिंग' का मामला
यह सारा विवाद 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान शुरू हुआ था। दानम नागेंद्र उस समय भारत राष्ट्र समिति (BRS) के मौजूदा विधायक थे, लेकिन उन्होंने सिकंदराबाद संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी के टिकट पर नामांकन दाखिल कर दिया। इस कदम को संविधान की दसवीं अनुसूची (Tenth Schedule) के पैरा 2(1)(a) का उल्लंघन माना गया।
हालांकि, मार्च 2024 में विधानसभा अध्यक्ष गद्दम प्रसाद कुमार ने अयोग्यता की याचिकाओं को खारिज कर दिया था, लेकिन बाद में तेलंगाना हाई कोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए 23 अप्रैल 2024 से नागेंद्र को अयोग्य घोषित कर दिया था।
अब क्या होगा?
इस कानूनी फैसले ने खैरताबाद विधानसभा सीट को खाली कर दिया है। अब भारतीय चुनाव आयोग (Election Commission of India) को यहां उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला तेलंगाना की राजनीति में स्थिरता के लिहाज से एक बड़ा संकेत है, क्योंकि यह 'आया राम-गया राम' की राजनीति पर लगाम लगाने के लिए कोर्ट की सख्त मंशा को दर्शाता है। निवेशकों और मार्केट पर नजर रखने वालों के लिए यह जरूरी है क्योंकि उपचुनाव के परिणाम विधानसभा की वर्तमान गणित को बदल सकते हैं और राज्य की राजनीतिक स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं।
