सुप्रीम कोर्ट ने MMTC की याचिका खारिज कर NSEL निवेशकों के लिए **₹1,950 करोड़** के सेटलमेंट का रास्ता साफ कर दिया है। इस फैसले से **5,600** से ज्यादा लेनदारों को उनके क्लेम का **42%** हिस्सा वापस मिलने की उम्मीद जगी है।
कानूनी बाधाएं दूर
सुप्रीम कोर्ट ने MMTC (Metals and Minerals Trading Corporation) की अपील को खारिज कर दिया है, जिससे NSEL (National Spot Exchange Limited) मामले में सालों से चल रहा कानूनी गतिरोध समाप्त हो गया है। अब NCLAT द्वारा मंजूर किए गए सेटलमेंट प्लान पर काम शुरू हो सकेगा। यह 13 साल पुराने उस पेमेंट डिफॉल्ट मामले का अंत है जो साल 2013 में शुरू हुआ था।
क्या है सेटलमेंट का गणित?
इस योजना के तहत कुल 5,682 लेनदारों को फायदा होगा। उन्हें अपने वेरिफाइड क्लेम का लगभग 42% हिस्सा रिकवर करने का मौका मिलेगा। इस पूरे प्रोसेस को पूरा करने की जिम्मेदारी 63 moons technologies Ltd को दी गई है। सेटलमेंट की गणना 31 जुलाई, 2024 तक के बकाया के आधार पर की गई है।
फंड का इंतजाम कैसे होगा?
इस भुगतान के लिए PMLA (Prevention of Money Laundering Act) के तहत बनी स्पेशल कोर्ट ने ED (Enforcement Directorate) को अटैच की गई संपत्तियों को बेचने की इजाजत दे दी है। इन संपत्तियों की कुल कीमत करीब ₹3,464 करोड़ आंकी गई है। हालांकि, वितरण के लिए ₹1,950 करोड़ की ही जरूरत है, इसलिए इसके ऊपर से जो भी राशि आएगी, वह कोर्ट की कस्टडी में रहेगी।
अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि ED कितनी तेजी से इन संपत्तियों की नीलामी कर पाता है, क्योंकि सफल वितरण पूरी तरह से एसेट मॉनेटाइजेशन और कोर्ट की शर्तों के पालन पर निर्भर करेगा।
