Supreme Court का बड़ा फैसला: गलत हलफनामा देने वाले उम्मीदवारों पर अब आम नागरिक दर्ज करा सकेंगे क्रिमिनल केस

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Supreme Court का बड़ा फैसला: गलत हलफनामा देने वाले उम्मीदवारों पर अब आम नागरिक दर्ज करा सकेंगे क्रिमिनल केस

सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि अब कोई भी आम नागरिक चुनाव उम्मीदवारों द्वारा गलत हलफनामा (Affidavit) दाखिल करने पर सीधे क्रिमिनल शिकायत दर्ज करा सकता है। इस फैसले से चुनावी पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।

कानूनी बाधाएं दूर

जस्टिस दीपंकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने स्पष्ट किया है कि 'कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर' की सेक्शन 195 की बाधाएं 'रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट' की सेक्शन 125A के तहत आने वाले अपराधों पर लागू नहीं होंगी। इस फैसले से पहले, आम नागरिकों को किसी भी शिकायत के लिए सरकारी अधिकारी या चुनाव आयोग की मंजूरी का इंतजार करना पड़ता था, जो एक बड़ी कानूनी अड़चन थी।

पारदर्शिता पर जोर

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से अब मतदाता सीधे उम्मीदवारों की संपत्ति, देनदारियों और बैकग्राउंड से जुड़ी गलत जानकारियों को चुनौती दे सकेंगे। कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि कानून के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए मजिस्ट्रेट के पास पहले से ही अधिकार हैं। अगर कोई शिकायत दुर्भावनापूर्ण पाई जाती है, तो अदालत उस पर जुर्माना भी लगा सकती है।

भविष्य पर असर

हालांकि, कोर्ट ने कर्नाटक के विधायक शैलेंद्र बेलदले से जुड़े मामले को फिर से शुरू करने से इनकार कर दिया है, जिससे यह साफ है कि अदालत का मकसद केवल भविष्य के लिए एक मजबूत लीगल फ्रेमवर्क तैयार करना था। यह फैसला भारतीय राजनीति में गवर्नेंस के मानकों को ऊपर उठाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब चुनावी प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों को अपनी जानकारी देते समय पहले से कहीं अधिक सतर्क रहना होगा।

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