Supreme Court: सोशल मीडिया पर अब पेरेंट्स की मंजूरी अनिवार्य? सरकार से मांगा जवाब

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AuthorMehul Desai|Published at:
Supreme Court: सोशल मीडिया पर अब पेरेंट्स की मंजूरी अनिवार्य? सरकार से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नाबालिगों के लिए 'पेरेंटल कंसेंट' (Parental Consent) यानी माता-पिता की सहमति अनिवार्य करने पर विचार करने का निर्देश दिया है। इस फैसले से टेक कंपनियों के यूजर बेस और ऑपरेशनल कॉस्ट पर सीधा असर पड़ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह तय करने के लिए 4 हफ्ते का समय दिया है कि क्या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नाबालिगों के अकाउंट बनाने के लिए माता-पिता की मंजूरी जरूरी होनी चाहिए। इसका मकसद बच्चों को डेटा मिसयूज और आपत्तिजनक कंटेंट से बचाना है।

टेक कंपनियों के सामने बड़ी चुनौती

इस फैसले का असर Meta Platforms (Facebook, Instagram) और Snap Inc. जैसी दिग्गज टेक कंपनियों पर पड़ सकता है। फिलहाल ये प्लेटफॉर्म्स 13 साल से ऊपर के बच्चों को बिना सख्त एज वेरिफिकेशन के अकाउंट बनाने की अनुमति देते हैं। अगर सरकार अनिवार्य सहमति का नियम लाती है, तो इन कंपनियों को अपने साइन-अप प्रोसेस को पूरी तरह बदलना होगा।

निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?

निवेशकों को इस पर नजर रखनी चाहिए क्योंकि:

  • यूजर ग्रोथ: साइन-अप प्रोसेस में कड़ी शर्तों के कारण नए यूजर्स जुड़ने की रफ्तार धीमी हो सकती है।
  • ऑपरेशनल कॉस्ट: पेरेंटल वेरिफिकेशन सिस्टम बनाने और उसे मेंटेन करने से कंपनियों का खर्च बढ़ेगा, जिसका सीधा असर उनके मार्जिन पर पड़ेगा।
  • विज्ञापन का असर: माइनर्स एक बड़ा कंज्यूमर बेस हैं, अगर पेरेंट्स एक्सेस कम करते हैं, तो विज्ञापनों की टारगेटिंग पर भी बुरा असर पड़ेगा।

यह कदम भारत के Digital Personal Data Protection (DPDP) Act, 2023 के साथ जुड़ा हुआ है। अब देखना यह है कि क्या सरकार एक नया फ्रेमवर्क लाती है या मौजूदा कानूनों के जरिए इसे लागू करती है। कंपनियों के लिए अब मुख्य चुनौती यह है कि वे सुरक्षा मानकों को कैसे पूरा करें, बिना अपने यूजर बेस को नुकसान पहुंचाए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.