सुप्रीम कोर्ट ने Gstaad Hotels और Neo Capricorn Plaza के अधिग्रहण पर मुहर लगा दी है। Shree Naman Developers की **₹1,800 करोड़** की रिजॉल्यूशन योजना से कर्जदाताओं को बड़ी राहत मिली है और पूरा पैसा वापस मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने Gstaad Hotels और Neo Capricorn Plaza को लेकर लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद को समाप्त कर दिया है। अदालत ने उन सभी अपीलों को खारिज कर दिया है जो इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस को चुनौती दे रही थीं। इस फैसले के बाद अब बेंगलुरु के JW Marriott और पुणे के Crowne Plaza जैसे बड़े होटल्स का मैनेजमेंट अब Shree Naman Developers के हाथों में होगा।
कर्जदाताओं के लिए बड़ी राहत
वित्तीय मोर्चे पर यह डील काफी अहम है। इस रिजॉल्यूशन प्लान की कुल वैल्यू ₹1,800 करोड़ है, जो कि ₹1,227 करोड़ के स्वीकृत कर्ज (Admitted Debt) से कहीं अधिक है। यह एक दुर्लभ मामला है जहां कर्जदाताओं को 100% रिकवरी मिल रही है। इन लोंस को साल 2022 में Omkara Asset Reconstruction को सौंपा गया था, जब साल 2017 में Piramal Finance द्वारा दिया गया कर्ज डिफॉल्ट हो गया था।
इंसॉल्वेंसी कानून पर बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में इंसॉल्वेंसी मामलों की सुनवाई कैसे होगी। जजों ने साफ कहा है कि ट्रिब्यूनल का मुख्य फोकस केवल 'कर्ज डिफॉल्ट' को साबित करने पर होना चाहिए। अब कंपनियां केवल अकाउंटिंग एंट्रीज या छोटी-मोटी विवादित गणनाओं का हवाला देकर दिवालिया प्रक्रिया में देरी नहीं कर सकेंगी।
अदालत ने साफ किया कि अगर कंपनी के पास पॉजिटिव कैश फ्लो है, तो भी वह कर्ज समय पर न चुकाने के लिए बहाना नहीं बना सकती। इस फैसले ने NCLT (National Company Law Tribunal) द्वारा मंजूर किए गए रिजॉल्यूशन प्लान की विश्वसनीयता को और मजबूत कर दिया है।
