सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश को पलट दिया है, जिसमें महाराष्ट्र FDA को एक प्राइवेट डेयरी को **₹5 लाख** हर्जाना देने के लिए कहा गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए रेगुलेटरी बॉडी का एक्शन पूरी तरह जायज है।
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बॉम्बे हाई कोर्ट के एक फैसले को पलटते हुए महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) को बड़ी राहत दी है। मामला पुणे की 'गुरुनानक डेयरी एंड स्वीट्स' से जुड़ा था, जिसे हाई कोर्ट ने ₹5 लाख हर्जाना देने का आदेश दिया था। यह विवाद तब शुरू हुआ जब FDA ने फूड पॉइजनिंग की शिकायतों और परिसर में गंदगी मिलने के बाद डेयरी का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया था।
पब्लिक सेफ्टी और रेगुलेटरी पावर
डेयरी ऑपरेटर ने लाइसेंस सस्पेंशन को चुनौती दी थी और हाई कोर्ट ने माना था कि एजेंसी का कदम 'जरूरत से ज्यादा' था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि रेगुलेटर्स को 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट' के तहत अपने कर्तव्य निभाने की पूरी आजादी है। कोर्ट ने कहा कि पब्लिक हेल्थ के लिए उठाए गए कदम पर प्रशासन पर हर बार वित्तीय जवाबदेही (Financial Liability) का खतरा नहीं होना चाहिए।
फूड सेक्टर के लिए क्या हैं मायने?
यह फैसला फूड और बेवरेज इंडस्ट्री से जुड़ी कंपनियों के लिए एक कड़ा संदेश है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि स्वच्छता और सुरक्षा मानकों के साथ समझौता करने पर रेगुलेटर्स कड़ी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र हैं। अब बिजनेस के लिए जरूरी हो गया है कि वे नियमों का सख्ती से पालन करें, क्योंकि किसी भी उल्लंघन पर कोर्ट अब रेगुलेटरी बॉडी के प्रशासनिक फैसलों को ज्यादा अहमियत दे रहा है।
