Supreme Court: न्यायिक लाइव-स्ट्रीमिंग पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, क्लिप्स से कमाई करने वालों पर कसेगा शिकंजा

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AuthorNeha Patil|Published at:
Supreme Court: न्यायिक लाइव-स्ट्रीमिंग पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, क्लिप्स से कमाई करने वालों पर कसेगा शिकंजा

9 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अदालती कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग जारी रहेगी, लेकिन कोर्टरूम वीडियो के दुरुपयोग और उसके व्यवसायीकरण पर कड़ी रोक लगाई जाएगी।

चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को न्यायिक कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। अदालत ने साफ कहा है कि लाइव-स्ट्रीमिंग का मकसद पारदर्शिता है, न कि सोशल मीडिया चैनलों या वकीलों के लिए कमाई का जरिया बनाना।

गलत इस्तेमाल पर सख्त रुख

अदालत ने उन थर्ड-पार्टी प्लेटफॉर्म्स पर निशाना साधा है जो कोर्ट की क्लिप्स को एडिट करके या गलत संदर्भ (Out-of-context) में पेश कर विज्ञापन से पैसा कमा रहे हैं। बेंच ने इसे बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के नियमों का उल्लंघन माना है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि निष्पक्ष रिपोर्टिंग करने वाले न्यूज संगठनों पर कोई पाबंदी नहीं होगी।

नई गाइडलाइंस का इंतजार

इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को आदेश दिया है कि वे अगले 2 हफ्तों के भीतर सभी हाई कोर्ट्स और स्टेकहोल्डर्स से सुझाव लेकर एक औपचारिक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करें। तब तक, जुलाई 2026 का वह अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा, जो कोर्ट क्लिप्स के अनाधिकृत संपादन और प्रसार को रोकता है।

डिजिटल मीडिया के लिए जोखिम

निवेशकों और डिजिटल मीडिया फर्मों के लिए यह खबर एक संकेत है कि भविष्य में रेगुलेटरी सख्ती बढ़ सकती है। जो प्लेटफॉर्म केवल कोर्ट के वायरल कंटेंट और विज्ञापनों पर निर्भर हैं, उनके रेवेन्यू मॉडल पर सीधा असर पड़ सकता है। आने वाले समय में कंटेंट की सत्यता और कॉपीराइट से जुड़े कड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य हो सकता है, जो इन कंपनियों की ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ा सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.