सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग (Election Commission) को Trinamool Congress के अंदरूनी नेतृत्व विवाद को सुलझाने के लिए एक निश्चित समय सीमा देने का निर्देश दिया है। पार्टी का सिंबल फ्रीज होने के बाद **6 अक्टूबर** को होने वाले वेस्ट बंगाल उपचुनावों के लिए अंतरिम व्यवस्था लागू की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने Trinamool Congress के नेतृत्व और पार्टी सिंबल विवाद में हस्तक्षेप करते हुए चुनाव आयोग से पूरे मामले को सुलझाने के लिए एक स्पष्ट टाइमलाइन मांगी है। चीफ जस्टिस सूर्या कांत की अगुवाई वाली बेंच ने स्पष्ट किया है कि लंबे समय तक चलने वाले आंतरिक झगड़ों से पैदा होने वाली राजनीतिक अनिश्चितता को रोकना जरूरी है। अदालत ने इस मामले में महाराष्ट्र के शिवसेना विवाद जैसी कानूनी जटिलताओं का भी हवाला दिया।
विवाद की जड़ क्या है?
यह पूरा मामला पार्टी के नाम और उसके 'फूल और घास' वाले सिंबल पर हक जताने को लेकर है। दोनों गुटों के दावों के बीच, चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को असली पार्टी पहचान को फ्रीज कर दिया था। 6 अक्टूबर को होने वाले वेस्ट बंगाल बाय-पोल्स (Bypolls) के लिए आयोग ने फिलहाल अंतरिम व्यवस्था की है। ममता बनर्जी गुट को एक संशोधित पहचान और 'फुटबॉल प्लेयर' का सिंबल दिया गया है, जबकि ऋतब्रत बनर्जी गुट को अलग नाम के साथ 'लिफाफा' (Envelope) सिंबल आवंटित किया गया है।
कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं?
ममता बनर्जी गुट के वकीलों ने तर्क दिया कि चुनाव आयोग का यह आदेश गलत समय पर आया, क्योंकि यह चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद जारी किया गया था। उन्होंने दावा किया कि इससे उनके पास कानूनी रास्ता तलाशने का समय कम बचा है। वहीं, दूसरे पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया कि मामले में दस्तावेजों और हलफनामों की संख्या बहुत अधिक है, इसलिए निष्पक्ष फैसले के लिए जल्दबाजी नहीं की जानी चाहिए।
फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने मामले को अगले हफ्ते तक के लिए टाल दिया है। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि चुनाव आयोग अंतिम फैसले के लिए कितना समय मांगता है।
