Supreme Court ने साफ कर दिया है कि वकीलों को तय जगहों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का संवैधानिक अधिकार है। चीफ जस्टिस Surya Kant की बेंच अब मंगलवार को पुलिस हिरासत और बल प्रयोग से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों के हालिया प्रदर्शनों और उनसे जुड़े विवादों पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस Surya Kant, जस्टिस Joymalya Bagchi और जस्टिस V. Mohana की बेंच ने माना कि वकीलों के पास शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का मौलिक अधिकार है, बशर्ते वे प्रशासन द्वारा तय की गई जगहों का पालन करें।\n\nयह न्यायिक हस्तक्षेप Supreme Court Bar Association द्वारा दायर याचिका के बाद आया है। याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) Gyanesh Kumar के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान वकीलों के साथ हुई बदसलूकी और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। वकीलों का आरोप है कि पुलिस ने अत्यधिक बल का प्रयोग किया और उन्हें हिरासत में लिया। इसके साथ ही, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं।\n\nन्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाए रखते हुए, चीफ जस्टिस ने विपक्षी नेताओं जैसे Rahul Gandhi और Mallikarjun Kharge से मिलने के अनुरोध को ठुकरा दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले के 'sub judice' होने के कारण राजनेताओं से मिलना अनुचित होगा।\n\nकोर्ट ने अब 13 अक्टूबर, 2026 को अगली सुनवाई तय की है। इसमें पुलिस के रवैये, वकीलों की हिरासत और इंटरनेट सेवाओं के निलंबन की जांच की जाएगी। कोर्ट ने सभी पक्षों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि प्रदर्शनों से सुप्रीम कोर्ट का कामकाज या आम लोगों की आवाजाही प्रभावित न हो। निवेशकों और मार्केट के नजरिए से भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश में संस्थागत स्थिरता और कानून-व्यवस्था बाजार के सेंटीमेंट को सीधे प्रभावित करते हैं।
