Subhash Chandra का NCLT को बड़ा झटका: 5-मेंबर बेंच की वैधता को दी चुनौती

LAWCOURT
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Subhash Chandra का NCLT को बड़ा झटका: 5-मेंबर बेंच की वैधता को दी चुनौती

Essel Group के चेयरमैन Subhash Chandra ने अपनी पर्सनल इनसॉल्वेंसी (Insolvency) मामले की सुनवाई कर रही NCLT की 5-सदस्यीय बेंच की वैधता पर सवाल उठाए हैं। कंपनी पर कुल **₹22,006 करोड़** का कर्ज है, जबकि रीपेमेंट प्लान केवल **₹6.25 करोड़** का था।

Essel Group के चेयरमैन Subhash Chandra ने NCLT द्वारा उनकी पर्सनल इनसॉल्वेंसी कार्यवाही के लिए बनाई गई पांच-सदस्यीय स्पेशल बेंच के गठन को कानूनी रूप से चुनौती दी है। NCLAT के सामने पेश हुए उनके वकीलों ने तर्क दिया कि कंपनीज एक्ट, 2013 के तहत ट्राइब्यूनल के पास इतनी बड़ी बेंच बनाने का संवैधानिक अधिकार नहीं है।

विवाद की जड़ क्या है?

यह पूरा मामला 25 अगस्त, 2026 को आए उस फैसले के बाद गरमाया, जिसमें पहले एक रीपेमेंट प्लान को मंजूरी दी गई थी। हालांकि, बाद में इस बेंच ने जजों के बीच आम सहमति न होने के कारण उस ऑर्डर पर स्टे लगा दिया। इस केस में कुल लायबिलिटी ₹22,006 करोड़ है, जबकि विवाद का केंद्र बना रीपेमेंट ऑफर सिर्फ ₹6.25 करोड़ का था।

कानून और लेंडर्स का स्टैंड

सुभाष चंद्रा के वकीलों का दावा है कि NCLT की यह प्रक्रिया कंपनीज एक्ट की धारा 419(5) का उल्लंघन करती है। फिलहाल, LIC Housing Finance और Union Bank of India जैसे लेंडर्स की अपील पर सुनवाई करते हुए NCLAT ने मामले को 7 अक्टूबर, 2026 तक के लिए टाल दिया है।

लेंडर्स के लिए रिस्क

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए NCLT ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सुभाष चंद्रा अपनी किसी भी संपत्ति को बेच या ट्रांसफर नहीं कर सकते। फिलहाल पूरा मामला कानूनी दांव-पेच में उलझा हुआ है और लेंडर्स के लिए रिकवरी का रास्ता अभी भी अनिश्चित बना हुआ है। अब सबकी नजरें अक्टूबर में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि आगे की कानूनी प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.