Subhash Chandra ने अपनी संपत्ति पर लगी रोक को चुनौती देते हुए NCLAT का दरवाजा खटखटाया है। यह मामला **₹22,006 करोड़** के व्यक्तिगत दिवालियापन (Personal Insolvency) से जुड़ा है, जिसके लिए **₹6.5 करोड़** का सेटलमेंट ऑफर पेश किया गया था।
Subhash Chandra ने NCLT के उस आदेश को NCLAT में चुनौती दी है, जिसमें उनकी संपत्ति की बिक्री या ट्रांसफर पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई थी। यह विवाद तब शुरू हुआ जब पर्सनल इन्सॉल्वेंसी की कार्यवाही के दौरान उनकी संपत्तियों को फ्रीज कर दिया गया।
विवाद की जड़: कर्ज और सेटलमेंट
मामले का मुख्य पेंच ₹22,006 करोड़ की कुल देनदारी और उसके एवज में दिए गए महज ₹6.5 करोड़ के सेटलमेंट ऑफर के इर्द-गिर्द घूम रहा है। इस सेटलमेंट प्लान को लेकर NCLT की दो सदस्यीय बेंच में काफी मतभेद रहे, जिसके बाद मामला एक बड़ी बेंच के पास पहुंचा और अंततः एसेट्स को फ्रीज करने का आदेश दिया गया।
कानूनी दांव-पेच
NCLAT में दायर अपनी याचिका में Subhash Chandra का तर्क है कि पांच सदस्यीय बेंच ने कंपनी कानून की धारा 419(5) के तहत अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम किया है। उनका दावा है कि दोबारा जवाब तलब करना और संपत्ति को फ्रीज करना केस की पूरी सुनवाई को फिर से शुरू करने जैसा है, न कि केवल मतभेदों को सुलझाना।
अब आगे क्या?
जस्टिस योगेश खन्ना की अध्यक्षता वाली NCLAT बेंच ने निर्देश दिया है कि इस मामले में सभी लेनदारों (Creditors) को औपचारिक रूप से शामिल किया जाए, क्योंकि पिछली कार्यवाही में कई लेनदारों को जरूरी दस्तावेज नहीं मिलने की शिकायत थी। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी, जिस पर पूरे मार्केट की नजरें टिकी हैं।
