Sri Lanka 22nd Amendment: संसद में वोटिंग का रास्ता साफ, जजों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने पर मुहर

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AuthorAditya Rao|Published at:
Sri Lanka 22nd Amendment: संसद में वोटिंग का रास्ता साफ, जजों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने पर मुहर

श्रीलंका की सुप्रीम कोर्ट ने 22वें संशोधन को संसद में पेश करने की मंजूरी दे दी है। इस बिल का लक्ष्य जजों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाकर **11 लाख** से ज्यादा लंबित केसों के बोझ को कम करना है।

संसद में क्या है स्थिति?

श्रीलंका की संसद के स्पीकर जगत विक्रमरत्ने ने सदन को सूचित किया कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि इस बदलाव के लिए किसी भी तरह के पब्लिक रेफरेंडम (जनमत संग्रह) की आवश्यकता नहीं है। अब यह बिल संसद में वोटिंग के लिए जाएगा, जहां राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके की 'नेशनल पीपुल्स पावर' गठबंधन के पास 159 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत है।

क्या बदलाव होने वाले हैं?

प्रस्तावित संशोधन के तहत सुप्रीम कोर्ट के जजों की रिटायरमेंट उम्र 65 साल से बढ़ाकर 67 साल और कोर्ट ऑफ अपील के जजों की उम्र 63 से बढ़ाकर 65 साल करने का लक्ष्य है। इसके अलावा, लोअर कोर्ट्स (हाई कोर्ट और मजिस्ट्रेट) के लिए रिटायरमेंट उम्र 62 साल तय की गई है। साथ ही, अपीलेट जजों की संख्या को 20 से बढ़ाकर 25 करने की भी योजना है।

निवेशकों और गवर्नेंस पर असर

सरकार का तर्क है कि अनुभव को लंबे समय तक सिस्टम में बनाए रखने से न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी। हालांकि, बार एसोसिएशन ऑफ श्रीलंका और कॉमनवेल्थ लॉयर्स एसोसिएशन जैसे संगठनों ने इसके विरोध में 60 से ज्यादा याचिकाएं दायर की हैं। जानकारों का कहना है कि निवेशकों के लिए किसी भी देश की न्यायिक स्थिरता और संस्थागत स्वतंत्रता बहुत मायने रखती है। अंतरराष्ट्रीय संस्थान जैसे IMF भी गवर्नेंस के इन पहलुओं पर बारीकी से नजर रखते हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार न्यायिक दक्षता और संस्थागत आजादी के बीच संतुलन कैसे बिठाती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.