SpiceJet को बड़ा झटका: कोर्ट का आदेश, ₹144 करोड़ का भुगतान नकद में ही करना होगा

LAWCOURT
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
SpiceJet को बड़ा झटका: कोर्ट का आदेश, ₹144 करोड़ का भुगतान नकद में ही करना होगा

Delhi High Court ने SpiceJet की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें कंपनी ने ₹144 करोड़ के भुगतान के बदले गुरुग्राम की जमीन गिरवी रखने का प्रस्ताव दिया था। अब एयरलाइन को यह राशि नकद में चुकानी होगी, जिससे कंपनी की फाइनेंशियल मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

Delhi High Court ने मंगलवार को SpiceJet Ltd की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें एयरलाइन ने ₹144 करोड़ के अनिवार्य कैश डिपॉजिट के बदले गुरुग्राम के उद्योग विहार में 1 एकड़ जमीन देने का प्रस्ताव दिया था। कंपनी ने इस जमीन की वैल्यू ₹400 करोड़ से ₹500 करोड़ के बीच बताई थी, लेकिन कोर्ट ने इस दलील को नहीं माना और स्पष्ट रूप से कहा कि बकाया भुगतान नकद में ही करना होगा।

यह कानूनी घटनाक्रम निवेशकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे कंपनी के कैश फ्लो मैनेजमेंट पर सीधा असर पड़ेगा। जमीन के बदले भुगतान का प्रस्ताव यह दर्शाता है कि कंपनी अपने लिक्विड कैश को बचाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है। कोर्ट के आदेश के बाद अब कंपनी को अन्य जरूरी ऑपरेशनल खर्चों को छोड़कर इस कानूनी देनदारी को पूरा करने के लिए बड़ी रकम जुटानी होगी।

विवाद की जड़ क्या है?

यह पूरा मामला साल 2015 के शेयर ट्रांसफर एग्रीमेंट से जुड़ा है, जो मौजूदा प्रमोटर अजय सिंह और पूर्व प्रमोटर कलानिधि मारन व KAL Airways के बीच हुआ था। शेयर ट्रांसफर को लेकर हुए विवाद के बाद साल 2017 में आर्बिट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हुई। आर्बिट्रेशन अवार्ड में एयरलाइन को ब्याज समेत ₹579 करोड़ रिफंड करने का निर्देश दिया गया था, और वर्तमान कानूनी लड़ाई इसी राशि की वसूली से जुड़ी है।

ऑपरेशंस पर क्या पड़ेगा असर?

निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता एयरलाइन की भविष्य की कार्यक्षमता को लेकर है। एविएशन एक ऐसा सेक्टर है जहां फ्यूल, मेंटेनेंस और लीज पेमेंट के लिए भारी लिक्विडिटी की जरूरत होती है। जब बड़ी रकम कोर्ट के आदेशों के पालन में चली जाती है, तो कंपनी के मार्जिन और ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी पर दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में कैपेसिटी बढ़ाने या फ्लीट अपग्रेड के लिए फंड की कमी हो सकती है।

आगे क्या देखें?

कोर्ट का यह सख्त रुख बताता है कि एयरलाइन की वित्तीय बाध्यताओं को लेकर ढील मिलने की गुंजाइश कम है। अगर कंपनी समय पर कैश नहीं जुटा पाती है, तो संपत्ति कुर्क होने या सख्त कानूनी कार्रवाई का खतरा बढ़ सकता है। अब निवेशकों की नजर कंपनी के एक्सचेंज फाइलिंग्स पर रहेगी कि वे इस लिक्विडिटी को जुटाने के लिए नया कैपिटल रेज करेंगे या कर्ज लेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.