Sir Dorabji Tata Trust ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के सामने अपना पक्ष रखा है। ट्रस्ट के दो सदस्यों वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह ने गवर्नेंस को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे, जिसका असर Tata Sons की **24%** हिस्सेदारी और उसके फैसलों पर पड़ सकता है।
Sir Dorabji Tata Trust (SDTT) ने अपनी आंतरिक शिकायतों को लेकर महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के पास अपना आधिकारिक जवाब दाखिल कर दिया है। मामला ट्रस्ट के दो ट्रस्टियों, वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह द्वारा उठाए गए गवर्नेंस संबंधी मुद्दों से जुड़ा है, जिस पर रेगुलेटरी बॉडी ने जवाब मांगा था।\n\n### क्या है पूरा विवाद?\n\nविवाद के केंद्र में ट्रस्टियों की भूमिका और निर्णय लेने की प्रक्रिया है। श्रीनिवासन और सिंह ने नोएल टाटा को 'परपेचुअल ट्रस्टी' (Perpetual Trustee) बनाने और Tata Sons की रणनीतियों पर ट्रस्ट के अत्यधिक प्रभाव को लेकर सवाल खड़े किए थे। चूंकि Tata Sons पूरे ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है, इसलिए मुख्य शेयरधारकों के बीच स्थिरता का होना कॉर्पोरेट कामकाज के लिए बहुत जरूरी है।\n\n### Tata Sons के लिए क्यों है अहम?\n\nSDTT के पास Tata Sons की 24% हिस्सेदारी है। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब टाटा ग्रुप एक बड़े रीस्ट्रक्चरिंग प्लान पर काम कर रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने ग्रुप की नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) को शेयर बाजार में लिस्ट करने का निर्देश दिया है। इन नियमों का पालन करने के लिए ग्रुप Tata Sons को 'होल्डिंग-कम-ऑपरेटिंग' कंपनी में बदलने के विकल्पों पर विचार कर रहा है।\n\nनिवेशकों और बाजार की नजर अब चैरिटी कमिश्नर के अगले कदम पर है। अगर इस कानूनी विवाद को सुलझाने में देरी होती है, तो ग्रुप के पुनर्गठन और रणनीतिक फैसलों की रफ्तार धीमी हो सकती है।
