Serious Fraud Investigation Office (SFIO) ने Xiaomi Technology India के खिलाफ औपचारिक जांच का प्रस्ताव दिया है। मामला विदेशी निवेश नियमों के संभावित उल्लंघन और कंपनी के बिजनेस स्ट्रक्चर से जुड़ा है।
जांच का दायरा और मकसद
Serious Fraud Investigation Office (SFIO) ने Xiaomi Technology India के कामकाज की गहराई से जांच का प्रस्ताव तैयार किया है। फिलहाल यह प्रस्ताव Ministry of Corporate Affairs की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। जांच में कंपनी के 21-पॉइंट स्ट्रक्चर, ओनरशिप पैटर्न और फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) के नियमों का पालन हुआ है या नहीं, इसकी गहन समीक्षा की जाएगी।
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर नजर
जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि क्या स्मार्टफोन दिग्गज ने ऑनलाइन सेल्स को लेकर बने सरकारी नियमों को दरकिनार किया है। नियामक यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या Amazon और Flipkart जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सेल के दौरान कंपनी का स्थानीय सेलर्स पर कोई अनौपचारिक कंट्रोल था। गौरतलब है कि भारत में ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए एक्सक्लूसिव डील्स और सेलर्स पर कंट्रोल को लेकर कड़े नियम हैं, ताकि छोटे रिटेलर्स को बचाया जा सके।
कंपनी का पक्ष और मौजूदा चुनौतियां
Xiaomi India ने स्पष्ट किया है कि उन्हें अब तक इस प्रस्तावित जांच को लेकर कोई औपचारिक नोटिस नहीं मिला है। कंपनी का कहना है कि वे सभी स्थानीय कानूनों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं। हालांकि, यह कानूनी विवाद कंपनी के लिए नई मुश्किल नहीं है। Xiaomi पहले ही ₹5,551 करोड़ (55.51 billion rupees) के फंड से जुड़े विवाद में फंसी है, जो सरकारी अधिकारियों द्वारा फ्रीज किए गए हैं।
एक समय भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में राज करने वाली इस कंपनी की मार्केट हिस्सेदारी अब गिरकर 13% रह गई है, जहां उसे Apple और Samsung जैसे प्रीमियम प्लेयर्स से कड़ी टक्कर मिल रही है। अब Ministry of Corporate Affairs का इस जांच पर अंतिम फैसला कंपनी के भविष्य के लिए बेहद अहम होगा।
