CBI ने DHFL के **₹34,000 करोड़** के फ्रॉड केस की जांच को प्रभावित करने के लिए **₹1 करोड़** की रिश्वत मांगने के आरोप में SFIO के डिप्टी डायरेक्टर को गिरफ्तार किया है। हालांकि, निवेशकों को यह समझना चाहिए कि DHFL का अधिग्रहण पहले ही हो चुका है और यह मामला पुरानी मैनेजमेंट से जुड़ा है।
रिश्वतखोरी का बड़ा खुलासा
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने Serious Fraud Investigation Office (SFIO) के एक बड़े अधिकारी पर भ्रष्टाचार के आरोप में कार्रवाई की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, डिप्टी डायरेक्टर हरीश कुमार तंवर को एक दिल्ली स्थित वकील और अन्य सहयोगियों के साथ रंगे हाथों पकड़ा गया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि तंवर ने DHFL केस की जांच को मोड़ने के लिए ₹1 करोड़ की घूस मांगी थी। CBI ने इस मामले में ₹20 लाख की घूस की पहली किश्त लेते हुए उन्हें दबोचा है।
पुराने मैनेजमेंट पर है शिकंजा
यह मामला ₹34,000 करोड़ के बैंक फ्रॉड से जुड़ा है, जिसमें DHFL के पूर्व प्रमोटर्स कपिल और धीरज वधावन मुख्य आरोपी हैं। आरोप है कि कंपनी ने हजारों फर्जी होम लोन खाते खोलकर अपने पोर्टफोलियो को गलत तरीके से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया था।
निवेशकों के लिए क्या है मतलब?
निवेशकों को यह स्पष्ट रूप से समझ लेना चाहिए कि यह जांच कंपनी के पुराने मैनेजमेंट और बीते समय में हुए फ्रॉड से जुड़ी है। Piramal Capital & Housing Finance ने साल 2021 में इंसॉल्वेंसी प्रोसेस के जरिए DHFL का अधिग्रहण कर लिया था। वर्तमान में कंपनी का कामकाज नए मालिकों के हाथों में सुरक्षित है और यह ताजा घटनाक्रम पुरानी कानूनी फाइलों से जुड़ा है। इस गिरफ्तारी से जांच की साख पर सवाल जरूर उठ रहे हैं, लेकिन इसका कंपनी के मौजूदा ऑपरेशन्स पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।
