25 वर्षीय Gade Sai Krishna की कस्टोडियल डेथ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दखल दिया है। कोर्ट ने सबूत गायब होने और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, जो राज्य में प्रशासनिक स्थिरता पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
सुप्रीम कोर्ट ने विजयवाड़ा में 25 वर्षीय Gade Sai Krishna की कस्टोडियल डेथ को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। हालिया सुनवाई के दौरान, बेंच ने मामले की जांच के दौरान CCTV फुटेज गायब होने और पीड़ित का शव पेश न कर पाने जैसी गंभीर चूकों पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाते हुए सभी रिकॉर्ड्स को सीलबंद लिफाफे में पेश करने का आदेश दिया है।
सीनियर लीडरशिप पर उठे सवाल
न्यायालय ने केवल जूनियर अधिकारियों तक सीमित जांच के दायरे पर भी सवाल उठाए। जजों ने कहा कि इस मामले में डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस, विजयवाड़ा पुलिस कमिश्नर और असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस जैसे सीनियर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को भी प्रतिवादी के रूप में शामिल किया है।
राजनीतिक तनाव और निवेशकों के लिए मायने
यह कानूनी खींचतान आंध्र प्रदेश की राजनीति में भी उबाल ला रही है। YSR कांग्रेस पार्टी ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की सरकार को घेरते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। निवेश के नजरिए से देखें, तो किसी भी राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति वहां के बिजनेस एनवायरमेंट की नींव होती है। अदालत का यह कड़ा रुख और जांच को फेडरल एजेंसी को सौंपने की संभावना राज्य की प्रशासनिक कार्यक्षमता और शासन की पारदर्शिता पर एक बड़े सवाल के रूप में देखी जा रही है।
अगली सुनवाई अक्टूबर में होनी है। बाजार के जानकारों की नजर अब इस पर है कि क्या केंद्र सरकार की जांच एजेंसी को औपचारिक रूप से बड़ी जांच सौंपी जाएगी और राज्य सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है।
