Supreme Court ने 2026 के उस संशोधन की समीक्षा शुरू कर दी है, जिसके तहत सार्वजनिक कार्यक्रमों में Vande Mataram के सभी 6 स्टैंजा गाना अनिवार्य है और उल्लंघन पर जेल की सजा का प्रावधान है।
सुप्रीम कोर्ट ने 'Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Act, 2026' की वैधता पर सवाल उठाए हैं। चीफ जस्टिस Surya Kant की बेंच इस बात की जांच कर रही है कि क्या 6 स्टैंजा वाला यह अनिवार्य नियम व्यक्तिगत अधिकारों और 'Freedom of Conscience' का हनन करता है।
याचिका का मुख्य आधार
मशहूर गायक TM Krishna द्वारा दायर याचिका में वरिष्ठ वकील S Muralidhar ने तर्क दिया है कि गाने के अंतिम 4 स्टैंजा में स्पष्ट रूप से धार्मिक और गैर-धर्मनिरपेक्ष तत्व हैं। याचिका के अनुसार, इसे न गाने पर 3 साल तक की कैद का डर नागरिकों को एक खास तरह की धार्मिक विचारधारा मानने के लिए मजबूर करना है।
कानूनी मिसाल और सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 1986 के 'Bijoe Emmanuel बनाम केरल राज्य' मामले का जिक्र किया, जो मौन रहने और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा करता है। वहीं, सरकार की ओर से पेश Solicitor General Tushar Mehta ने बचाव करते हुए कहा कि कानून संवैधानिक मानदंडों के तहत बना है और वंदे मातरम का राष्ट्रीय प्रतीक के तौर पर ऐतिहासिक महत्व है।
कोर्ट ने अब सरकार से इस पूरे मामले पर औपचारिक जवाब मांगा है। यह मामला भविष्य में राज्य के प्रतीकों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच के संतुलन को तय करने में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
