सुप्रीम कोर्ट ने हवाई किराये में बढ़ोतरी को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि 1 जनवरी, 2027 से लागू होने वाले 'भारतीय वायुयान नियम, 2026' के तहत एयरफेयर मार्केट-बेस्ड ही रहेगा, यानी इसमें कोई सरकारी कैप नहीं लगेगा।
मार्केट-बेस्ड प्राइसिंग पर मुहर
जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस मामले पर अर्जेंट सुनवाई से इनकार कर दिया है। कोर्ट का यह रुख साफ करता है कि न्यायपालिका एविएशन सेक्टर में बार-बार हस्तक्षेप करने के बजाय सरकारी नियमों के तहत ही मामले को देखना पसंद करेगी। एविएशन सेक्टर के लिए यह एक राहत भरी खबर है क्योंकि एयरलाइंस अब डिमांड और सप्लाई के हिसाब से अपने टिकट दाम तय करना जारी रखेंगी।
पारदर्शिता (Transparency) होगी अनिवार्य
भले ही सरकार ने किराये पर कोई लिमिट (Price Cap) न लगाई हो, लेकिन 'भारतीय वायुयान नियम, 2026' के तहत एयरलाइंस पर सख्ती जरूर बढ़ेगी। नई गाइडलाइंस के अनुसार, कंपनियों को टिकट की कुल कीमत, जिसमें टैक्स और सरचार्ज शामिल हैं, उसे स्पष्ट रूप से दिखाना होगा। इसका मुख्य उद्देश्य यात्रियों को मिलने वाली जानकारी में पारदर्शिता लाना और छिपे हुए चार्जेस को खत्म करना है।
अगली सुनवाई पर नज़र
सुप्रीम कोर्ट ने एविएशन रेगुलेशन से जुड़ी जनहित याचिका की अगली सुनवाई 16 नवंबर, 2026 के लिए तय की है। निवेशकों के लिए यह तारीख महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन यह स्पष्ट होगा कि सरकार के नए नियमों के साथ एयरलाइंस किस तरह तालमेल बैठा रही हैं।
