सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट से एक छात्र को भेजे गए शो-कॉज नोटिस पर जवाब मांगा है। यह कार्रवाई कोर्ट के उस आदेश का उल्लंघन मानी जा रही है जिसमें प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ सख्त कदम उठाने पर रोक लगाई गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार, 9 सितंबर 2026 को ग्रेटर नोएडा कमिश्नरेट के एक एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर गहरी नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने छात्र अक्षत त्रिपाठी को जारी उस शो-कॉज नोटिस पर सवाल उठाए, जिसमें उनसे ₹5 लाख के पर्सनल बॉन्ड की मांग की गई थी।
क्या है विवाद?
नोटिस में छात्र पर NEET-UG परीक्षा विवाद से संबंधित प्रदर्शनों के दौरान सरकार विरोधी प्रचार और साथियों को उकसाने का आरोप लगाया गया था। हालांकि, यह कदम 1 सितंबर 2026 के सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश के सीधे विपरीत था, जिसमें कोर्ट ने 20 जुलाई से 25 जुलाई 2026 के बीच हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी FIR को रद्द कर दिया था और छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
सरकारी पक्ष और कानूनी पेच
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार की ओर से पेश होते हुए स्पष्ट किया कि यह नोटिस जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से नहीं, बल्कि एक एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि प्रशासन इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक अन्य मामले सहित अलग-अलग कानूनी चुनौतियों का सामना कर रहा है। हालांकि नोटिस को वापस ले लिया गया है, लेकिन कोर्ट ने अपने पिछले निर्देशों के अनुपालन को लेकर औपचारिक स्पष्टीकरण मांगा है।
