सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में चल रही सुरक्षा पाबंदियों पर सख्त रुख अपनाते हुए इंटरनेट और मेट्रो सेवाओं को तुरंत बहाल करने का आदेश दिया है। इन प्रतिबंधों के कारण व्यापारिक गतिविधियों में **70%** की भारी गिरावट दर्ज की गई थी, जिससे त्योहारों के सीजन में कारोबार ठप पड़ गया था।
बाजार और व्यापार पर संकट
देश की राजधानी में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के कारण व्यापारिक माहौल पूरी तरह बिगड़ गया था। जस्टिस जॉयमल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि आम जनजीवन और व्यापार में बाधा डालने वाली किसी भी तरह की अनावश्यक रुकावट को तुरंत हटाया जाए। कनाट प्लेस और खान मार्केट जैसे प्रमुख कमर्शियल हब में काम-काज 70% तक गिर गया था, जो कि फेस्टिव सीजन के दौरान रिटेलर्स के लिए किसी बड़े आर्थिक झटके से कम नहीं है।
कोर्ट का सख्त संदेश
अदालत ने अधिकारियों को स्पष्ट किया है कि इंटरनेट सेवाओं की बहाली और मेट्रो संचालन को बिना किसी देरी के सामान्य किया जाए। कोर्ट ने उन खबरों पर भी संज्ञान लिया है जिनमें लगभग 7,000 लोगों को हिरासत में लेने की बात सामने आई थी। साथ ही, कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर पिछले आदेशों की अवमानना (Contempt) को लेकर जवाब भी मांगा है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
इन्वेस्टर्स के लिए फिलहाल सबसे बड़ा कंसर्न यही है कि शहर में शांति बनी रहे ताकि सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स सुचारू रूप से काम कर सकें। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं होती है, तो इसका असर लोकल माइक्रो-इकॉनमी और छोटी कंपनियों के रेवेन्यू पर पड़ सकता है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकारी मशीनरी कितनी तेजी से कोर्ट के आदेश का पालन करती है और व्यापारिक माहौल कब तक पूरी तरह पटरी पर आता है।
