सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट पर बैन लगाने के बजाय डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को एडवांस्ड कंटेंट डिटेक्शन सिस्टम अपनाने का आदेश दिया है। वहीं, हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने फॉरेस्ट जोन में सड़क निर्माण पर रोक लगा दी है और बिल्डिंग परमिट्स की ऑडिट शुरू कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नाबालिगों के लिए इंटरनेट पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना समाधान नहीं है। जस्टिस जे बी पारदीवाला और के वी चंद्रन की बेंच ने केंद्र सरकार को एक मजबूत रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करने का निर्देश दिया है, जिसका मकसद चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लोइटेशन मटेरियल को रोकना है। अब टेक प्लेटफॉर्म्स को परसेप्चुअल हैश मैचिंग (Perceptual hash matching) और URL लिस्टिंग जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना अनिवार्य होगा। सरकार इसके लिए एक नेशनल डेटाबेस भी तैयार करेगी। इस फैसले से टेक कंपनियों की कंप्लायंस कॉस्ट में बढ़ोत्तरी हो सकती है।
हिमाचल में रियल एस्टेट और इंफ्रा पर सख्ती
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य में निर्माण कार्यों के खिलाफ बड़ा फैसला लिया है। फॉरेस्ट जोन में सड़क निर्माण और तारकोल बिछाने के काम पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। कोर्ट ने पाया कि सेराज निर्वाचन क्षेत्र में 55 सड़कें बिना पर्यावरण मंजूरी (Forest Conservation Act, 1980) के बनाई गई थीं। इसके अलावा, कोर्ट 16 हेलीपैड्स की जांच भी कर रहा है।
सोलन-बरोग में ऑडिट का आदेश
रियल एस्टेट सेक्टर के लिए भी मुश्किलें बढ़ गई हैं। कोर्ट ने सोलन-बरोग क्षेत्र में पिछले 10 वर्षों में दिए गए परमिट्स की ऑडिट के आदेश दिए हैं। विशेष रूप से 21 बहुमंजिला इमारतों की जांच की जा रही है, क्योंकि कई बिल्डर्स ने 6 मंजिला ऊंचाई की सीमा का उल्लंघन किया है। अब सरकार को इन मंजिलों और फायर सेफ्टी नॉर्म्स के उल्लंघन पर जवाब देना होगा। इन न्यायिक फैसलों से टेक और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के लिए रेगुलेटरी रिस्क काफी बढ़ गया है।
