सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया है कि वे जिला अदालतों में महिला वकीलों के लिए अलग बार रूम और स्वच्छता सुविधाएं सुनिश्चित करें। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जमीन या बजट की कमी का बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने देश भर की निचली अदालतों में महिला कानूनी पेशेवरों के लिए बुनियादी सुविधाओं को अनिवार्य कर दिया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि इन सुविधाओं का अभाव पूरी तरह से अस्वीकार्य है। यह आदेश कार्यस्थल पर समानता और महिला वकीलों के लिए एक सुरक्षित वातावरण बनाने के उद्देश्य से दिया गया है।
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि बार रूम और सैनिटेशन की सुविधा हर हाल में बनानी होगी, भले ही उस कोर्ट में महिला वकीलों की संख्या कितनी भी क्यों न हो। इसे केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि एक प्रोफेशनल जरूरत के तौर पर देखा जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान उन सभी दलीलों को खारिज कर दिया, जिनमें जमीन की अनुपलब्धता या फंड की कमी का हवाला दिया गया था। कोर्ट ने साफ कर दिया कि प्रशासनिक अड़चनें एक समावेशी वातावरण बनाने में बाधक नहीं होनी चाहिए। अब हाई कोर्ट और राज्य सरकारों को इन बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन और बजट का इंतजाम करना होगा। मामले की अगली समीक्षा 2 दिसंबर 2026 को की जाएगी, जिसमें राज्यों को अपनी प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश करनी होगी।
