सुप्रीम कोर्ट ने विदेश मंत्रालय (MEA) को निर्देश दिया है कि वह रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए या लापता हुए भारतीयों के परिवारों की मदद के लिए एक पब्लिक नोटिस जारी करे। अब तक **267** भर्तियों में से **51** की मौत हो चुकी है और **77** अभी भी लापता हैं, जिन्हें लेकर कोर्ट ने मुआवजे और कानूनी सहायता पर जोर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की बेंच ने विदेश मंत्रालय (MEA) को आदेश दिया है कि वे रूस-यूक्रेन संघर्ष में अपने परिजनों को खोने वाले परिवारों के लिए मुआवजा प्रक्रिया को सरल बनाएं। इस पब्लिक नोटिस का मुख्य उद्देश्य उन परिवारों तक पहुंचना है, जिन्हें अभी तक वित्तीय सहायता और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी नहीं मिल पाई है।\n\nसरकारी आंकड़ों के अनुसार, कुल 267 भारतीय नागरिकों को रूसी सेना में भर्ती किया गया था। इनमें से 139 लोग सुरक्षित वापस आ चुके हैं, लेकिन बाकी के लिए स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, 51 भारतीयों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 77 लोग अभी भी लापता हैं।\n\n### परिवारों को मिलेगी मुफ्त कानूनी सहायता\n\nपीड़ित परिवारों की मदद के लिए कोर्ट ने राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों (District Legal Services Authorities) को निर्देश दिया है कि वे प्रभावित परिवारों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करें। यह सहायता मुख्य रूप से डीएनए (DNA) परीक्षण जैसी जटिल प्रक्रियाओं को पूरा करने और मुआवजे के दावों को सही ढंग से फाइल करने के लिए महत्वपूर्ण होगी। कोर्ट ने अब तक प्रोसेस हुए 6 मुआवजे के दावों की स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी है।\n\n### फर्जी एजेंटों पर कस रही शिकंजा\n\nमुआवजे के साथ-साथ, कोर्ट इस बात की भी गहन जांच कर रहा है कि कैसे फर्जी रिक्रूटमेंट एजेंटों ने भारतीय नागरिकों को विदेश में 'सिविलियन जॉब' का झांसा देकर युद्ध के मैदान में धकेला। इन एजेंटों ने लोगों के पासपोर्ट छीनकर उन्हें जबरन सैन्य भूमिकाओं में शामिल होने के लिए मजबूर किया था। यह मामला 'रिट याचिका (सिविल) संख्या 451/2026' के तहत चल रहा है।\n\nअब सभी की निगाहें विदेश मंत्रालय द्वारा दी जाने वाली अगली स्टेटस रिपोर्ट पर हैं, जिसमें मुआवजे के भुगतान और लापता लोगों की पहचान व वापसी की दिशा में हुई प्रगति का ब्योरा होगा।
