ब्लैक सी में 25 जुलाई, 2026 को हुए ड्रोन हमले के बाद से लापता दो भारतीय नाविकों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दखल दिया है। सर्च ऑपरेशन बंद होने के बाद, कोर्ट ने सरकार को परिवारों के इंश्योरेंस क्लेम प्रोसेस में मदद करने का निर्देश दिया है।
कानूनी और मानवीय संकट
चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अगुवाई वाली बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। जिन नाविकों का अता-पता नहीं है, उनके नाम दीपक कुमार गुप्ता और राम चंद्र दुबे हैं। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कोर्ट को जानकारी दी है कि यूक्रेन और रोमानियाई अधिकारियों द्वारा चलाया जा रहा सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन अब रोक दिया गया है, क्योंकि कोई नई जानकारी सामने नहीं आई है।
इंश्योरेंस क्लेम की चुनौती
पीड़ित परिवारों के सामने सबसे बड़ी बाधा 'डेथ सर्टिफिकेट' की अनुपलब्धता है, जो इंश्योरेंस क्लेम के लिए अनिवार्य होता है। कोर्ट ने अब विदेश मंत्रालय (MEA) को निर्देश दिया है कि वे प्रभावित परिवारों को कानूनी उलझनों को सुलझाने और इंश्योरेंस का लाभ दिलाने में पूरी मदद करें।
मार्केट पर असर और जोखिम
यह जहाज MV AGN Ragnar पलाऊ-फ्लैग वाला कार्गो शिप है, जिसे तुर्की की Neva Shipping Corporation मैनेज करती है। यह कंपनी पब्लिकली लिस्टेड नहीं है, इसलिए इसका भारतीय शेयर बाजार पर सीधा असर नहीं है। हालांकि, यह केस उन सिस्टमैटिक जोखिमों को उजागर करता है जिनका सामना भारतीय नाविक युद्धग्रस्त क्षेत्रों में काम करते समय करते हैं। निवेशकों और शिपिंग सेक्टर के लिए यह चिंता का विषय है कि विदेशी ऑपरेटर्स के साथ काम करने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और जवाबदेही के क्या मानक हैं।
