सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, और छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के लिए नए चीफ जस्टिस के नामों की सिफारिश की है। यह कदम न्यायिक प्रशासन में स्थिरता लाने के लिए उठाया गया है।
31 अगस्त, 2026 को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने देश के चार प्रमुख हाई कोर्ट्स में नई नियुक्तियों को अंतिम रूप दिया है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य अदालतों में लीडरशिप की कमी को दूर करना और कामकाज में निरंतरता बनाए रखना है।
प्रमुख नियुक्तियां:
- राजस्थान हाई कोर्ट: जस्टिस संजय के. अग्रवाल को चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की गई है।
- मध्य प्रदेश हाई कोर्ट: जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे का नाम प्रस्तावित किया गया है।
- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट: जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
- छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट: जस्टिस कृष्ण राम महापात्र का नाम चुना गया है, जो 4 सितंबर, 2026 को वर्तमान चीफ जस्टिस के रिटायरमेंट के बाद अपना पदभार संभालेंगे।
बिजनेस और जुडिशरी पर असर:
हाई कोर्ट्स का जुडिशियल नेतृत्व सीधे तौर पर कॉर्पोरेट लिटिगेशन, टैक्स विवाद और कमर्शियल केसों की सुनवाई की गति को प्रभावित करता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीफ जस्टिस के स्तर पर स्थिर नेतृत्व से केसों के निपटारे में तेजी आती है, जो बिजनेस के माहौल में अनिश्चितता को कम करने के लिए बेहद जरूरी है।
राजस्थान हाई कोर्ट को लेकर कॉलेजियम का निर्णय काफी अहम है, क्योंकि वहां पिछले कुछ समय से स्थानीय वकीलों और कार्यवाहक चीफ जस्टिस के बीच विवाद चल रहा था। बाहर से जज नियुक्त करके कॉलेजियम ने कोर्ट में स्थिरता बहाल करने की कोशिश की है। अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार पर हैं, क्योंकि इन सिफारिशों पर अंतिम मुहर सरकार की मंजूरी के बाद ही लगेगी।
