Supreme Court Collegium ने तीन हाई कोर्ट चीफ जस्टिस को सुप्रीम कोर्ट में प्रमोट करने की सिफारिश की है। इस कदम से सुप्रीम कोर्ट में जजों की वर्किंग स्ट्रेंथ बढ़कर **37** हो जाएगी, जिससे पेंडिंग मामलों और कॉर्पोरेट लिटिगेशन की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है।
जजों की नियुक्ति और सरकार की भूमिका
सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने तीन प्रमुख हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत करने का फैसला लिया है। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 34 है, जो इन नियुक्तियों के बाद बढ़कर 37 हो जाएगी। हालांकि, कोर्ट की सैंक्शन स्ट्रेंथ 38 है, जिसके करीब पहुंचने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। अब अंतिम मंजूरी के लिए यह प्रस्ताव यूनियन गवर्नमेंट के पास भेजा गया है।
बिजनेस जगत के लिए क्यों है जरूरी?
भारतीय मार्केट और बिजनेस इकोसिस्टम के लिए एक मजबूत न्यायपालिका का होना बेहद अहम है। तेज न्यायिक प्रक्रिया से कॉन्ट्रैक्ट एनफोर्समेंट और कॉर्पोरेट विवादों का निपटारा समय पर होता है। निवेशक अक्सर न्यायिक क्षमता पर नजर रखते हैं क्योंकि इससे बिजनेस की अनिश्चितताएं कम होती हैं और एक स्टेबल एनवायरनमेंट मिलता है।
कौन हैं ये नए नाम?
कोलेजियम की सिफारिशों में शामिल हैं:
- जस्टिस सुनीता अग्रवाल (गुजरात हाई कोर्ट)
- जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय (दिल्ली हाई कोर्ट)
- जस्टिस अपरेश कुमार सिंह (तेलंगाना हाई कोर्ट)
इन जजों को इलाहाबाद, बॉम्बे, झारखंड और त्रिपुरा जैसे हाई कोर्ट्स में काम करने का लंबा अनुभव है। आने वाले समय में सुप्रीम कोर्ट के कई सीनियर जज रिटायर होने वाले हैं, ऐसे में यह नियुक्तियां न्यायिक कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी हैं।
