सुप्रीम कोर्ट ने लंबित श्रम विवादों के लिए 'इंडस्ट्री' शब्द की कानूनी परिभाषा को स्पष्ट कर दिया है। साथ ही, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने घोषणा की है कि 1 अक्टूबर 2026 से बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट (BSBDA) से महीने में चार से ज़्यादा बार कैश निकालने पर ₹15 + GST का सर्विस चार्ज लगेगा।
सुप्रीम कोर्ट का 'इंडस्ट्री' पर फैसला
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 20 अगस्त 2026 को 'इंडस्ट्री' के कानूनी वर्गीकरण पर एक बड़ा फैसला सुनाया। नौ जजों की बेंच ने यह साफ किया कि 1978 का बेंगलुरु वाटर सप्लाई फैसला, जो श्रम संरक्षण को बढ़ाता था, इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट, 1947 के तहत लंबित मामलों पर लागू होता रहेगा। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह व्याख्या इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड, 2020 पर सीधे लागू नहीं होगी, जिसकी व्याख्या स्वतंत्र रूप से की जाएगी। इस फैसले से व्यवसायों और श्रम संगठनों के बीच चल रहे विवादों में कानूनी स्पष्टता आएगी।
SBI के BSBDA खातों पर नई चार्ज
इसके साथ ही, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपने बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट (BSBDA) के नियमों में बदलाव किया है। 1 अक्टूबर 2026 से, SBI इन खातों से हर महीने चार मुफ्त ट्रांजैक्शन की सीमा पार करने वाले प्रत्येक कैश विड्रॉल पर ₹15 + GST का शुल्क लेगा। यह मुफ्त ट्रांजैक्शन की सीमा ATM और बैंक ब्रांच, दोनों से होने वाले निकासी पर लागू होगी। बैंक ने यह भी पुष्टि की है कि इन खातों के लिए सभी डिजिटल ट्रांजैक्शन मुफ्त और असीमित रहेंगे।
SBI का यह कदम बैंक की फी-बेस्ड इनकम बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है। हालिया नतीजों में, SBI ने 2027 के फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में ₹21,121 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की तुलना में 10.23% की वृद्धि दर्शाता है। निवेशकों और ग्राहकों के लिए यह देखना अहम होगा कि सर्विस चार्ज में बदलाव से ग्राहकों के व्यवहार और बैंक की कुल आय पर क्या असर पड़ता है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर?
सुप्रीम कोर्ट के 'इंडस्ट्री' की परिभाषा पर आए फैसले का असर बड़े सेवा क्षेत्र, खासकर प्राइवेट हेल्थकेयर पर भी पड़ सकता है। संसद की कुछ कमेटियां अस्पताल के संचालन को लेकर नियम बनाने पर विचार कर रही हैं, जिसमें रूम रेंट कैप करने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। ऐसे में, 'इंडस्ट्री' क्या है, यह बहस का अहम मुद्दा बना हुआ है। अपोलो हॉस्पिटल्स और फोर्टिस हेल्थकेयर जैसी बड़ी हॉस्पिटल चेन ने पहले भी चिंता जताई थी कि कीमतों पर सख्त कैप उनके इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश और रेगुलेटरी अनुपालन को प्रभावित कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई कानूनी स्पष्टता इन सेक्टर्स को भविष्य में लेबर और ऑपरेशनल नियमों को समझने में मदद कर सकती है।
