सुप्रीम कोर्ट ने शिव सेना कॉरपोरेटर Ramesh Mhatre को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने उन्हें मिली जमानत को खारिज करते हुए **3** दिनों के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है। यह मामला जुलाई **2026** में डोंबिवली के शास्त्री नगर अस्पताल में मेडिकल स्टाफ के साथ हुई मारपीट से जुड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक कड़ा रुख अपनाते हुए शिव सेना कॉरपोरेटर रमेश म्हात्रे को 72 घंटों के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है। इस फैसले के साथ ही निचली अदालत से मिली उनकी जमानत अब खत्म हो गई है। यह विवाद 6 जुलाई को डोंबिवली के शास्त्री नगर अस्पताल में हुई एक हिंसक घटना से शुरू हुआ था, जहां रमेश म्हात्रे और उनके साथियों पर ड्यूटी पर मौजूद मेडिकल प्रोफेशनल्स के साथ मारपीट करने का आरोप लगा था। कल्याण-डोंबिवली म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के अधिकार क्षेत्र में हुई इस घटना ने पूरे देश में मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी थी।
कानूनी दांव-पेच और बचाव
इस मामले में म्हात्रे को 8 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। बॉम्बे हाई कोर्ट ने जुलाई में उनकी जमानत रद्द कर दी थी, लेकिन बाद में उन्हें अगस्त में सशर्त रिहाई मिल गई थी। सुप्रीम कोर्ट में बचाव पक्ष के वकील सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि मामले में अधिकतम सजा 5 साल की है और ट्रायल पहले से ही तेजी से चल रहा है। साथ ही, आरोपी के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड का हवाला देते हुए उनकी रिहाई बरकरार रखने की मांग की गई थी।
कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर्स के साथ हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोर्ट ने म्हात्रे के पुराने आपराधिक इतिहास की विस्तृत समीक्षा के आदेश भी दिए हैं। यह विवाद तब शुरू हुआ था जब एक गर्भवती महिला के इलाज को लेकर म्हात्रे और अस्पताल प्रशासन के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी, जो बाद में शारीरिक हिंसा में बदल गई।
आगे की राह
अब स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर प्रकाश सालसिंगीकर इस केस की पैरवी कर रहे हैं और सुनवाई को फास्ट-ट्रैक किया जा रहा है। अक्टूबर के शुरुआती दिनों में एक महिला फिजिशियन की गवाही दर्ज होनी है। इस हाई-प्रोफाइल मामले पर स्थानीय गवर्नेंस और कानूनी जानकारों की नजरें टिकी हुई हैं।
