जुलाई 2026 में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर्ड इंक्वायरी कमेटी (HPEC) ने एक ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया है। जस्टिस आर सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता वाली यह कमेटी अब चश्मदीदों से सबूत मांगेगी।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर्ड इंक्वायरी कमेटी (HPEC) ने जुलाई 2026 में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों से जुड़े सबूत जुटाने के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च कर दिया है। गवाह अब आधिकारिक पोर्टल hpec.nic.in पर जाकर अपने दस्तावेज, वीडियो और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी साझा कर सकते हैं। इसके अलावा, जो लोग डिजिटल माध्यम का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं, वे नई दिल्ली स्थित कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से अपनी गवाही दे सकते हैं।
कमेटी में शामिल दिग्गज
इस 5 सदस्यीय कमेटी की कमान रिटायर्ड जस्टिस आर सुभाष रेड्डी के हाथों में है। पैनल में पूर्व CBI डायरेक्टर ऋषि कुमार शुक्ला और रिटायर्ड पुलिस चीफ एल आर बिश्नोई जैसे विशेषज्ञ शामिल हैं। कमेटी का मुख्य काम Cockroach Janta Party के नेतृत्व वाले उस आंदोलन की जांच करना है, जिसके कारण तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
क्या है जांच का मुख्य फोकस?
जांच का दायरा जंतर-मंतर पर हुई झड़पों से लेकर सुरक्षा बलों द्वारा बल प्रयोग के आरोपों तक फैला है। पैनल विशेष रूप से प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन के इस्तेमाल और उत्पीड़न की शिकायतों की गहन जांच कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि गवाहों की सुरक्षा सर्वोपरि है और उनकी पहचान को पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा ताकि कोई भी बिना किसी डर के सच सामने ला सके।
