Ketan Parekh को झटका! SAT ने ठुकराई गवाहों से जिरह की अर्ज़ी, SEBI केस में बड़ा मोड़

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Ketan Parekh को झटका! SAT ने ठुकराई गवाहों से जिरह की अर्ज़ी, SEBI केस में बड़ा मोड़

सेक्यूरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) ने केतन पारेख की वह याचिका खारिज कर दी है जिसमें उन्होंने दो गवाहों से जिरह (cross-examine) करने की मांग की थी। यह मामला SEBI की ओर से केतन पारेख पर लगाए गए फ्रंट-रनिंग के आरोपों से जुड़ा है, जिसमें उन पर **₹65.77 करोड़** के अवैध लाभ कमाने का आरोप है।

SAT का फैसला: 'गलत मंशा वाली अर्ज़ी'

SAT के पीठासीन अधिकारी जस्टिस PS दिनेश कुमार ने केतन पारेख की इस अर्ज़ी को 'misconceived' यानी गलत मंशा वाली बताया। ट्रिब्यूनल का कहना है कि मामले में अंतिम निर्णय के लिए सुनवाई पहले ही आरक्षित (reserved for final adjudication) हो चुकी है, ऐसे में अब गवाहों से जिरह की अनुमति देना सही नहीं होगा। यह फैसला इस हाई-प्रोफाइल रेगुलेटरी जांच में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो 2025 की शुरुआत में शुरू हुई थी।

SEBI की जांच का बैकग्राउंड

जनवरी 2025 में, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक अंतरिम आदेश जारी कर केतन पारेख और सिंगापुर स्थित ट्रेडर रोहित सालगाओकर को सिक्योरिटीज मार्केट से प्रतिबंधित कर दिया था। रेगुलेटर ने आरोप लगाया था कि उन्होंने एक बड़े अमेरिकी-आधारित ग्लोबल फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर (FPI) के सौदों में फ्रंट-रनिंग की। इस FPI का एसेट करीब $2.5 ट्रिलियन है। SEBI का कहना है कि पारेख ने एक नेटवर्क का इस्तेमाल करके इन सौदों में फ्रंट-रनिंग की, जिससे ₹65.77 करोड़ का अवैध लाभ हुआ, जिसे रेगुलेटर वसूलना चाहता है।

SEBI ने अपनी दलील में यह भी कहा कि जिन दो गवाहों से जिरह की अर्ज़ी दी गई थी, उनके बयानों का इस्तेमाल पारेख के खिलाफ कोई प्रतिकूल निष्कर्ष निकालने के लिए नहीं किया गया था। साथ ही, इन व्यक्तियों का ज़िक्र जनवरी 2025 के अंतरिम आदेश में था ही नहीं।

रेगुलेटरी जांच का बढ़ता दायरा

इस जांच का दायरा अब पारेख और सालगाओकर के शुरुआती आरोपों से आगे बढ़ गया है। मई 2026 में, SEBI ने कैपिटल ग्रुप से जुड़े छह फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) को कारण बताओ नोटिस जारी किए। रेगुलेटर इन फंड्स के आंतरिक नियंत्रणों में संभावित खामियों की जांच कर रहा है, खासकर ट्रेड की गोपनीयता बनाए रखने के संबंध में। यह दर्शाता है कि जांच अब सिस्टमैटिक जोखिमों का मूल्यांकन कर रही है और यह पता लगा रही है कि क्या जानकारी लीक को रोकने के लिए उचित जांच-परख मौजूद थी।

निवेशकों और बाजार पर नजर रखने वालों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात SEBI का आगामी अंतिम आदेश है। इस निर्णय का परिणाम आगे के जुर्माने, संभावित स्थायी प्रतिबंध या अतिरिक्त प्रवर्तन कार्रवाइयों की सीमा तय करेगा। बाजार इस बात पर भी नजर रखेगा कि विदेशी फंडों की चल रही जांच से बड़े FPIs संवेदनशील व्यापार जानकारी को कैसे संभालते हैं, इसे लेकर सख्त रेगुलेटरी दिशानिर्देश बन पाते हैं या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.