Reliance Industries ने Essel Group के चेयरमैन Subhash Chandra द्वारा अपने मीडिया बिजनेस पर लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। यह घटनाक्रम NCLT में चल रही निजी दिवालियापन (insolvency) की कार्यवाही के बीच सामने आया है।
Reliance Industries Limited ने BSE और NSE को दी एक रेगुलेटरी फाइलिंग में साफ किया है कि Subhash Chandra द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं। कंपनी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उनके मीडिया एसेट्स का इस्तेमाल कभी भी किसी व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए नहीं किया गया है और वे अपने प्रोफेशनल स्टैंडर्ड्स पर पूरी तरह कायम हैं।
NCLT में क्या चल रहा है?
यह विवाद एक लंबी कानूनी प्रक्रिया के बीच उपजा है, जो NCLT में Subhash Chandra की निजी दिवालियापन (insolvency) कार्यवाही से जुड़ी है। हाल ही में ट्रिब्यूनल के एक तीसरे सदस्य ने रेजोल्यूशन प्लान के पक्ष में निर्णायक वोट दिया है, जिसके तहत ₹6.5 करोड़ के सेटलमेंट का प्रस्ताव है। हालांकि, LIC Housing Finance सहित अन्य क्रेडिटर्स इस प्लान का कड़ा विरोध कर रहे हैं।
कर्ज और लायबिलिटी का विवाद
इस पूरे केस की सबसे बड़ी उलझन लायबिलिटी के आंकड़ों को लेकर है:
- क्रेडिटर्स का दावा है कि Subhash Chandra पर ₹22,006 करोड़ का बकाया है।
- दूसरी ओर, Subhash Chandra का तर्क है कि गारंटर के तौर पर उनकी देनदारी सिर्फ ₹3,992 करोड़ ही है।
- उनका यह भी कहना है कि इन लोन से जुड़ी कंपनियों ने अब तक कुल ₹43,000 करोड़ का भुगतान किया है।
अब यह मामला वापस NCLT की डिवीजन बेंच के पास जाएगा, जहां तीसरे सदस्य की राय के आधार पर औपचारिक आदेश जारी होने की उम्मीद है। मार्केट एक्सपर्ट्स की नजर इस बात पर है कि यह मामला कैसे सुलझता है, क्योंकि इसका असर भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर में व्यक्तिगत गारंटरों की जवाबदेही तय करने के कानूनी तरीके पर पड़ेगा।
