राजस्थान सरकार ने 'राजस्थान समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026' के मसौदे को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक का उद्देश्य विवाह, विरासत और तलाक जैसे मामलों में कानूनों को मानकीकृत करना है। यह विधेयक, जिसमें स्पष्ट रूप से आदिवासी समुदायों को बाहर रखा गया है, 20 अगस्त, 2026 से शुरू होने वाले मानसून सत्र के दौरान राज्य विधानसभा में पेश किया जाएगा।
राजस्थान में लागू होगा समान नागरिक संहिता?
राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने 13 अगस्त, 2026 को 'राजस्थान समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026' के मसौदे को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी है। इस कदम का मकसद पूरे राज्य में एक एकीकृत कानूनी ढांचा स्थापित करना है, जिसमें विवाह, तलाक, विरासत, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों को नियंत्रित करने वाले व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक सामान्य नियम लागू होंगे।
विधेयक के मुख्य प्रावधान
प्रस्तावित कानून के प्रमुख प्रावधानों में 60 दिनों के भीतर विवाह का अनिवार्य पंजीकरण, बहुविवाह पर रोक और बेटा-बेटी के लिए समान विरासत अधिकार शामिल हैं। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि आदिवासी समुदायों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है, ताकि उनके मौजूदा रीति-रिवाजों और प्रथाओं को इन नए नियमों से अलग रखा जा सके।
विधानसभा सत्र में होगा पेश
अब इस विधेयक को राजस्थान विधान सभा में आगामी मानसून सत्र के दौरान पेश किया जाएगा, जो 20 अगस्त, 2026 से शुरू होने वाला है। विधानसभा में होने वाली चर्चाएं कानून के अंतिम स्वरूप और राज्य भर में इसके कार्यान्वयन की समय-सीमा तय करने की प्रक्रिया में अगला कदम होंगी।
अन्य विधेयक को भी मिली मंजूरी
UCC विधेयक के साथ-साथ, कैबिनेट ने 'राजस्थान वृक्ष संरक्षण विधेयक, 2026' को भी मंजूरी दी है। यह एक अलग कानूनी उपाय है जिसका उद्देश्य पूरे राज्य में 29 विशिष्ट वृक्ष प्रजातियों के संरक्षण और सुरक्षा को अनिवार्य करना है। यह वर्तमान सत्र के दौरान नीतिगत अपडेट पर एक व्यापक विधायी फोकस को दर्शाता है।
हालांकि यह विकास एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ऐसे विधायी परिवर्तनों में जटिल कार्यान्वयन प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं, जैसा कि अन्य जगहों पर देखा गया है जिन्होंने समान कानूनी ढांचे पर नेविगेट किया है। इच्छुक पर्यवेक्षकों को विधेयक के विशिष्ट परिचालन विवरण और अंतिम संस्करण के लिए आगामी विधानसभा सत्रों की निगरानी करनी चाहिए क्योंकि यह विधायी प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ता है।
