राज्यसभा सांसद Raghav Chadha की सदस्यता को लेकर चल रहे विवाद पर विराम लग गया है। वोटर लिस्ट से नाम हटने के बावजूद, **2003** के 'Representation of the People Act' में हुए संशोधन के कारण उनकी कुर्सी पूरी तरह सुरक्षित है।
हाल ही में Raghav Chadha के पंजाब के चुनावी रोल से नाम 'शिफ्ट' होने को लेकर सियासी गलियारों में बहस छिड़ गई थी। कई सवाल उठाए जा रहे थे कि क्या इससे उनकी राज्यसभा सदस्यता पर कोई असर पड़ेगा। लेकिन कानूनी विशेषज्ञों और प्रशासनिक रिकॉर्ड के मुताबिक, उनकी स्थिति पूरी तरह से वैध है।\n\n### कानून का क्या है प्रावधान?\n\nइस मामले का आधार 1951 का 'Representation of the People Act' है, जिसमें अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के कार्यकाल के दौरान 2003 में संशोधन किया गया था। इस बदलाव ने राज्यसभा उम्मीदवारों के लिए उस विशेष राज्य का पंजीकृत मतदाता होना अनिवार्य नहीं रखा, जिसका वे प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। अब नियम यह है कि उम्मीदवार का भारत में कहीं भी मतदाता होना पर्याप्त है।\n\n### सुप्रीम कोर्ट की मुहर\n\nइस कानून की वैधता को 2006 में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जहां कोर्ट ने साफ किया कि संविधान राज्यसभा सदस्यता के लिए राज्य-स्तरीय निवास की मांग नहीं करता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक सांसद का जनादेश राज्य के विधायकों के वोटों से मिलता है, न कि उनके रहने के पते से।\n\n### दिल्ली शिफ्टिंग का असर\n\nअप्रैल 2026 में आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़ने और भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने के बाद, Raghav Chadha ने अपना वोटर रजिस्ट्रेशन दिल्ली में करवा लिया था। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि चूंकि कानून के तहत प्रतिनिधित्व वाले राज्य में निवास करना अनिवार्य नहीं है, इसलिए दिल्ली शिफ्ट होने से उनकी राज्यसभा सदस्यता पर कोई कानूनी आंच नहीं आती है। यह मामला अब पूरी तरह से सुलझा हुआ माना जा रहा है।
