लॉरेंस बिश्नोई गैंग के अहम सदस्य कर्मवीर सिंह को दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया गया है। कनाडा से डिपोर्ट होकर भारत आते ही पंजाब पुलिस की एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) ने उसे हिरासत में ले लिया है।
बिश्नोई गैंग का 'लॉजिस्टिक्स' हैंडलर
जांच एजेंसियों के मुताबिक, कर्मवीर सिंह इस अपराध नेटवर्क का एक प्रमुख चेहरा है। वह अमेरिका में अनमोल बिश्नोई—जो कि जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई का भाई है—को न केवल सुरक्षित ठिकाने (Safe Houses) मुहैया करा रहा था, बल्कि उसे जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट देने का मुख्य हैंडलर भी था। उत्तरी अमेरिका में बैठे गिरोह के सदस्यों के लिए उसका ठिकाना एक 'सेंट्रल हब' की तरह काम कर रहा था।
गंभीर आरोपों का बोझ
कर्मवीर सिंह के खिलाफ भारत में कानून का शिकंजा कस गया है। उस पर आर्म्स एक्ट और पासपोर्ट एक्ट के तहत कई गंभीर मुकदमे दर्ज हैं। उस पर हत्या, हत्या की कोशिश, जबरन वसूली और लूटपाट जैसे संगीन आरोप हैं। पंजाब AGTF ने 3 सितंबर, 2026 को ही उसके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी कर दिया था, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के सहयोग से उसकी घेराबंदी की गई।
अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर प्रहार
यह गिरफ्तारी संगठित अपराध सिंडिकेट्स के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। हाल ही में मोल्डोवा से अमृतपाल सिंह (उर्फ अमृत डालम) के प्रत्यर्पण के बाद, कर्मवीर की यह गिरफ्तारी यह साबित करती है कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियां अब विदेशों में छिपे गैंगस्टर्स के खिलाफ सख्त और समन्वित कार्रवाई कर रही हैं। अब पुलिस पूछताछ के जरिए उसके फंडिंग चैनल्स और अन्य आपराधिक साजिशों की परतें खोलने की तैयारी में है।
