पंजाब सरकार की बड़ी यू-टर्न! पूर्व CM की हत्या के दोषी जगतार हवारा को पैरोल देने की सिफारिश

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AuthorAditya Rao|Published at:
पंजाब सरकार की बड़ी यू-टर्न! पूर्व CM की हत्या के दोषी जगतार हवारा को पैरोल देने की सिफारिश

पंजाब सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के दोषी जगतार सिंह हवारा को 10 दिन की पैरोल देने के लिए राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से सिफारिश की है। यह फैसला फरवरी 2026 के विपरीत है, जब राज्य की जेल विभाग ने 25 आपराधिक मामलों का हवाला देते हुए उनकी पैरोल अर्जी ठुकरा दी थी।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को एक औपचारिक अर्जी भेजी है। इसमें उन्होंने जगतार सिंह हवारा को 10 दिन की पैरोल देने की मांग की है। हवारा फिलहाल दिल्ली की मंडोली जेल में पूर्व सीएम बेअंत सिंह की 1995 में हुई हत्या में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। सरकार की ओर से यह कदम हवारा की 81 वर्षीय मां के बिगड़ते स्वास्थ्य को देखते हुए उठाया गया है।

यह कदम पंजाब सरकार के फरवरी 2026 के रुख से बिल्कुल अलग है। तब राज्य के जेल विभाग ने हवारा को पैरोल देने के खिलाफ अपनी सिफारिश दी थी। उस समय, ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन के निदेशक और फतेहगढ़ साहिब के एसएसपी की रिपोर्टों में हवारा के खिलाफ चल रहे 25 आपराधिक मामलों का हवाला दिया गया था। अब पुलिस रिपोर्टों के आधार पर इनकार से हटकर मानवीय आधार पर पैरोल की अर्जी देना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

इस पैरोल अर्जी का समय भी अहम है, क्योंकि हाल ही में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने हवारा की पैरोल अर्जी पर समयबद्ध फैसला लेने के निर्देश दिए थे। इसके बाद ही राज्य सरकार ने अपनी वर्तमान स्थिति स्पष्ट की है।

यह मुद्दा पंजाब में काफी राजनीतिक महत्व रखता है, खासकर 'बंदी सिंहों' की रिहाई की मांग के संबंध में। कई सिख संगठन उन सिख कैदियों की रिहाई की मांग कर रहे हैं जिन्होंने अपनी जेल की सजा पूरी कर ली है, लेकिन अभी भी जेल में हैं। हवारा इन मांगों और विरोध प्रदर्शनों का एक अहम चेहरा रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह नीतिगत बदलाव आगामी राजनीतिक चुनावों से पहले कुछ खास वोटबैंक को लुभाने की एक रणनीतिक चाल हो सकती है, हालांकि यह राज्य में एक संवेदनशील और ध्रुवीकरण वाला विषय बना हुआ है।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह एक सामाजिक-राजनीतिक और कानूनी विकास है। इसका भारतीय शेयर बाजार, वित्तीय सूचकांकों या कॉर्पोरेट संचालन पर कोई सीधा या अप्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ता है। इस प्रशासनिक निर्णय से कोई भी सूचीबद्ध कंपनी, वित्तीय साधन या व्यावसायिक क्षेत्र प्रभावित नहीं हुआ है। निवेशक और जनता राज्यपाल की प्रतिक्रिया और इस मामले में किसी भी आगे की कानूनी या राजनीतिक प्रतिक्रिया पर राज्य की नीति और जनभावना के परिप्रेक्ष्य में नजर रख सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.