NCLAT ने Polycab India के खिलाफ चल रही दिवालियापन (Insolvency) कार्यवाही को रद्द कर दिया है। इस फैसले से कंपनी पर डेरिवेटिव्स डीलिस्टिंग का खतरा टल गया है और कामकाज पूरी तरह सामान्य हो गया है।
कानूनी संकट से मिली बड़ी राहत
नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने Polycab India के खिलाफ चल रही दिवालिया कार्यवाही को आधिकारिक रूप से खारिज कर दिया है। यह फैसला ऑपरेशनल क्रेडिटर Asier Metals Private Ltd के साथ हुए कानूनी विवाद को सुलझाता है, जिन्होंने ₹2.79 करोड़ के कथित बकाया भुगतान को लेकर कंपनी पर दबाव बनाया था। NCLAT के इस फैसले ने अहमदाबाद NCLT की उस बेंच के फैसले को पलट दिया है, जिसने 7 अक्टूबर को इस याचिका को स्वीकार किया था।
कंपनी का मास्टर स्ट्रोक
अगस्त 2026 में शुरू हुए इस विवाद के दौरान, Polycab के मैनेजमेंट ने तर्क दिया था कि यह मामला महज एक कमर्शियल डिस्प्यूट है। अपनी वित्तीय प्रतिबद्धता साबित करने के लिए कंपनी ने विवादित पूरी राशि NCLAT रजिस्ट्रार के पास फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा कर दी थी, जिसके बाद अब दिवालियापन का खतरा पूरी तरह समाप्त हो गया है।
मार्केट और डेरिवेटिव्स पर असर
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स की डीलिस्टिंग थी। एक्सचेंज प्रोटोकॉल के तहत, दिवालिया कार्यवाही शुरू होने पर कंपनी के फ्यूचर्स और ऑप्शंस सेगमेंट को बाहर करने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी, जिसे 30 दिसंबर 2026 तक पूरा होना था। NCLAT के इस आदेश के बाद अब ट्रेडिंग के सामान्य होने की उम्मीद है। साथ ही, ट्रिब्यूनल ने MSCI इंडेक्स से कंपनी को बाहर निकलने से भी पहले ही रोक दिया था, ताकि बाजार में अनावश्यक अस्थिरता न फैले।
मामूली रकम, बड़ा इम्पैक्ट
गौर करने वाली बात यह है कि ₹2.79 करोड़ का विवाद कंपनी के ₹1.1 लाख करोड़ से अधिक के मार्केट कैप के सामने बेहद मामूली है। हालांकि, इंसॉल्वेंसी का टैग शेयरधारकों और ट्रेडर्स के लिए बड़ा सिरदर्द बना हुआ था, जो अब खत्म हो चुका है। अब मार्केट की नजर इस बात पर है कि एक्सचेंज कब औपचारिक सर्कुलर जारी कर डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग की बहाली की पुष्टि करते हैं।
