Police Force Limits: BNSS और आपके कानूनी अधिकार, जानिए क्या कहती है प्रक्रिया

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Police Force Limits: BNSS और आपके कानूनी अधिकार, जानिए क्या कहती है प्रक्रिया

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत विरोध प्रदर्शनों को लेकर कड़े नियम तय किए गए हैं। कानून के जानकारों का कहना है कि पुलिस को बल का प्रयोग केवल तभी करना चाहिए जब यह बेहद जरूरी हो और स्थिति के अनुपात में हो।

विरोध प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना, इन दोनों के बीच संतुलन बिठाना एक बड़ी कानूनी चुनौती है। इस व्यवस्था के केंद्र में अब 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (BNSS) है, जिसने पुराने क्रिमिनल प्रोसीजर कोड की जगह ली है। BNSS की धारा 172 स्पष्ट रूप से पुलिस अधिकारियों को गैरकानूनी भीड़ को तितर-बितर करने का अधिकार देती है। हालांकि, यह अधिकार असीमित नहीं है; किसी भी तरह की कार्रवाई—चाहे वह चेतावनी देना हो या शारीरिक बल का प्रयोग—स्थिति की गंभीरता के अनुरूप ही होनी चाहिए।

आनुपातिकता का सिद्धांत (Proportionality Doctrine)

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस को स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केवल 'न्यूनतम जरूरी बल' का ही उपयोग करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के रामलीला मैदान फैसले जैसे कई ऐतिहासिक निर्णयों में भी यह बात कही गई है कि सार्वजनिक सभाओं पर प्रतिबंध कम से कम हानिकारक तरीके से लगाए जाने चाहिए। प्रशासन को शारीरिक बल का उपयोग करने से पहले बातचीत और चेतावनी जैसे विकल्पों को प्राथमिकता देनी चाहिए। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल का प्रयोग संविधान के अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन माना जाता है।

हिरासत और मानवाधिकार

यदि पुलिस किसी को हिरासत में लेती है, तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह से प्रशासन की होती है। हिरासत में लिए गए व्यक्ति को तत्काल चिकित्सा सहायता पाने का पूरा अधिकार है। इसके अलावा, न्यायिक व्याख्या के अनुसार, मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की 24 घंटे की समय-सीमा हिरासत में लिए जाने के क्षण से शुरू होती है, न कि औपचारिक गिरफ्तारी के समय से। यह स्पष्टीकरण प्रशासनिक मनमानी पर रोक लगाने में एक महत्वपूर्ण चेक के रूप में काम करता है।

न्यायिक निगरानी

पुलिस के पास ट्रैफिक और सार्वजनिक सुरक्षा प्रबंधन का अधिकार है, लेकिन इसका उपयोग वैध विरोध को दबाने के लिए नहीं किया जा सकता। न्यायपालिका का स्पष्ट मानना है कि केवल प्रदर्शन की अनुमति न होना इसे कुचलने का पर्याप्त कारण नहीं है, जब तक कि वह सार्वजनिक शांति के लिए बड़ा खतरा न हो। अंततः, पुलिस कार्रवाई की वैधता केवल कानून की शक्ति से नहीं, बल्कि उस स्थिति में उसकी तर्कसंगतता और आवश्यकता से तय होती है।

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