Patna High Court ने 2010 के एक पुराने मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए रेप के प्रयास की सजा को 'महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने' (outraging modesty) के अपराध में बदल दिया है। जस्टिस संदीप कुमार ने कहा कि केवल घर में घुसना और रोकना रेप का प्रयास साबित नहीं करता।
कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
जस्टिस संदीप कुमार ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष यह तो साबित करने में सफल रहा कि आरोपी ने घर में घुसकर पीड़िता को रोका था, लेकिन यह 'रेप के प्रयास' के कानूनी पैमाने पर खरा नहीं उतरता। कोर्ट ने कहा कि किसी अपराध को रेप के प्रयास की श्रेणी में रखने के लिए penetration (यौन संबंध बनाने का प्रयास) या उससे जुड़े ठोस सबूतों का होना अनिवार्य है, जो इस मामले में नहीं मिले।
मुआवजे का आदेश और सजा में बदलाव
न्यायालय ने इस केस में 16 साल तक चले लंबे कानूनी सफर को ध्यान में रखा। आरोपी का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होने के कारण, कोर्ट ने उसकी जेल की सजा को उस समय तक ही सीमित रखा, जो वह पहले ही काट चुका है। इसके साथ ही, कोर्ट ने आरोपी को पीड़िता को ₹25,000 का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
आगे के लिए नजीर
यह फैसला निचली अदालतों के लिए एक बड़ी मिसाल है। कोर्ट ने साफ किया कि 'घर में घुसने' और 'रेप के प्रयास' के बीच कानूनी अंतर स्पष्ट होना चाहिए। अब सरकारी जांच एजेंसियों को भविष्य में ऐसे मामलों में ठोस सबूत जुटाने पर और अधिक सतर्क रहना होगा, क्योंकि साक्ष्यों की कमी के कारण गंभीर धाराओं को बरकरार रखना संभव नहीं है।
