बिहार टेंडर घोटाले की जांच को लेकर Patna High Court ने Enforcement Directorate (ED) और Special Vigilance Unit (SVU) की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। कोर्ट ने जांच के दायरे पर चिंता जताते हुए इसे 'चुनिंदा' करार दिया है।
जांच में कहां है गड़बड़ी?
पटना हाईकोर्ट के जस्टिस सत्यव्रत वर्मा ने 15 अक्टूबर की सुनवाई के दौरान तीखे तेवर अपनाए। कोर्ट का मानना है कि इस मल्टी-करोड़ टेंडर घोटाले में केवल छोटे स्तर के लोगों को पकड़ा जा रहा है, जबकि मुख्य सूत्रधार अभी भी जांच के दायरे से बाहर हैं। यह मामला ठेकेदार ऋषिश्री से जुड़ा है, जो 27 मई से न्यायिक हिरासत में है।
ED बनाम SVU: डेटा में भारी अंतर
कोर्ट ने जांच एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी पर भी सवाल उठाए हैं। ED ने जो सबूत पेश किए हैं, उनमें 6 सीनियर सरकारी अधिकारियों के नाम शामिल हैं, लेकिन SVU ने केवल 3 के खिलाफ मामला दर्ज किया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि बाकी अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।
इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के लिए जोखिम
यह जांच Water Resources, Health और Public Health Engineering जैसे महत्वपूर्ण विभागों से जुड़ी परियोजनाओं की है। इस तरह के कानूनी घटनाक्रम अक्सर सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स में शामिल निजी कंपनियों के लिए प्रोजेक्ट में देरी और पेमेंट में अड़चनें पैदा कर सकते हैं।
अब आगे क्या?
हाईकोर्ट ने अब SVU को आधिकारिक रूप से प्रतिवादी (Respondent) बनने का निर्देश दिया है। एजेंसी को एक विस्तृत हलफनामा (Counter-affidavit) दाखिल कर यह बताना होगा कि जांच का दायरा सीमित क्यों है। मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी, जिस पर मार्केट और संबंधित स्टेकहोल्डर्स की नजर बनी रहेगी।
