पटना हाईकोर्ट ने 2025 में बिहार के भोजपुर जिले में एक्साइज पुलिस की हिरासत से गायब हुए मनोज कुमार के मामले की जांच अब CBI को सौंप दी है। कोर्ट ने स्थानीय पुलिस की जांच में गंभीर पक्षपात और सुस्ती पर चिंता जताई है। CBI को 11 सितंबर 2026 तक एक्शन-टेकन रिपोर्ट देनी होगी।
पुलिस की जांच पर कोर्ट की कड़ी नाराजगी
पटना हाईकोर्ट ने मनोज कुमार नाम के शख्स के लापता होने के मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी CBI को सौंपने का निर्देश दिया है। मनोज कुमार बिहार के भोजपुर जिले का रहने वाला था और अगस्त 2025 में एक्साइज पुलिस की हिरासत में आने के बाद गायब हो गया था।
जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस आलोक कुमार सिन्हा की बेंच ने राज्य पुलिस द्वारा की गई जांच की समीक्षा के बाद इस मामले में गंभीर खामियां पाईं। कोर्ट ने पुलिस की जांच में सुस्ती और पक्षपात के गंभीर आरोप लगाए। कोर्ट ने कहा कि पुलिस का यह कहना कि मनोज कुमार चलती गाड़ी से कूदकर भाग गया था, उसमें कई विसंगतियां हैं। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि इस मामले में राज्य की जांच एजेंसी की विश्वसनीयता दांव पर लगी है।
न्यायाधीशों ने यह भी पाया कि FIR में एक्साइज पुलिस के कई अधिकारियों के नाम संदिग्ध के तौर पर दर्ज थे। कोर्ट ने विशेष रूप से कुछ असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टरों की ओर इशारा किया, जो जांच को प्रभावित कर सकते थे, जिससे सबूत इकट्ठा करने की प्रक्रिया की अखंडता पर सवाल उठ रहे थे। CBI को यह जांच स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से करने की जिम्मेदारी दी गई है।
मामले की पृष्ठभूमि और टाइमलाइन
मनोज कुमार को आखिरी बार 13 अगस्त 2025 को देखा गया था। उसने अपने परिवार को बताया था कि उसे शराब पीने के आरोप में हिरासत में लिया गया है। हिरासत में पिटाई की खबर देने के कुछ ही देर बाद परिवार का उससे संपर्क टूट गया। अगले ही दिन मनोज के पिता ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई, लेकिन कोर्ट ने पाया कि स्थानीय पुलिस की प्रतिक्रिया इस गंभीर मामले के लिए पर्याप्त नहीं थी।
CBI को अब अनुभवी अधिकारियों की एक टीम गठित करने का निर्देश दिया गया है। यह एजेंसी अब शुरुआती जांच में शामिल रहे अधिकारियों से पूछताछ कर सकेगी। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर 2026 को होगी, जब CBI को अपनी कार्रवाई रिपोर्ट कोर्ट में पेश करनी होगी।
