Patna Ganga Floodplain: सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, अवैध निर्माण हटाने के लिए दिया आखिरी मौका

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AuthorMehul Desai|Published at:
Patna Ganga Floodplain: सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, अवैध निर्माण हटाने के लिए दिया आखिरी मौका

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को पटना में गंगा के किनारे स्थित अवैध ढांचों को हटाने के लिए अंतिम **8 सप्ताह** का समय दिया है। मानसून की बाधाओं के बाद मिली इस मोहलत के खत्म होते ही अधिकारियों पर अवमानना (Contempt) की कार्रवाई हो सकती है।

कोर्ट की दो टूक चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार प्रशासन को नौजर घाट से नूरपुर घाट के बीच गंगा के फ्लडप्लेन में बने अवैध निर्माणों को साफ करने का अंतिम निर्देश दिया है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने साफ कर दिया है कि 8 हफ्ते की यह समय सीमा आखिरी है और इसके बाद कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। यदि प्रशासन इस समय में कार्रवाई पूरी नहीं करता है, तो राज्य के मुख्य सचिव (Chief Secretary) को कोर्ट में तलब किया जा सकता है।

क्यों बढ़ाई गई समय सीमा?

राज्य सरकार ने पहले मिले 6 हफ्ते के समय का हवाला देते हुए बताया कि नेपाल से छोड़े गए पानी और भारी मानसून के कारण काम में बाधा आई थी। हालांकि, कोर्ट ने इस दलील के बावजूद और अधिक समय देने से इनकार कर दिया है।

संपत्ति के दावों पर स्पष्ट निर्देश

जिन लोगों का इन जमीनों या निर्माणों पर कानूनी दावा है, उन्हें अधिकारियों के पास अपने आधिकारिक दस्तावेज और निर्माण की मंजूरी (Construction Sanctions) जमा करनी होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वैध कागजात न होने पर ऐसे दावों को शून्य माना जाएगा और प्रशासन बिना किसी रुकावट के ध्वस्तीकरण (Demolition) की प्रक्रिया जारी रखेगा।

यह पूरा मामला साल 2020 के नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के उस आदेश से जुड़ा है, जिसका उद्देश्य गंगा के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) की सुरक्षा करना है। पटना में बढ़ते अतिक्रमण के कारण बाढ़ का खतरा बना रहता है, जिसे रोकने के लिए यह कानूनी दखल अनिवार्य हो गया है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.