One Nation, One Election: संसदीय समिति ने सुप्रीम कोर्ट का दौरा किया रद्द, छिड़ा संवैधानिक विवाद

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
One Nation, One Election: संसदीय समिति ने सुप्रीम कोर्ट का दौरा किया रद्द, छिड़ा संवैधानिक विवाद

संसद की संयुक्त समिति ने 'One Nation, One Election' बिल को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने का अपना प्रस्तावित दौरा रद्द कर दिया है। कानूनी विशेषज्ञों और विपक्ष के कड़े विरोध के बाद यह फैसला लिया गया है, जिसमें 'सेपरेशन ऑफ पावर्स' यानी शक्तियों के बंटवारे को लेकर चिंता जताई गई थी।

विवाद की मुख्य वजह

'One Nation, One Election' पहल की समीक्षा कर रही संयुक्त संसदीय समिति का 6 अक्टूबर, 2026 को सुप्रीम कोर्ट जाने का कार्यक्रम था। इस मुलाकात का मकसद प्रस्तावित बिल के कानूनी पहलुओं पर जजों और कानून निर्माताओं के बीच अनौपचारिक चर्चा करना था। हालांकि, संवैधानिक विशेषज्ञों और विपक्ष ने इस पर सवाल खड़े कर दिए कि क्या विधायिका और न्यायपालिका का इस तरह का मेल-मिलाप उचित है?

'सेपरेशन ऑफ पावर्स' पर सवाल

भारतीय संविधान का बुनियादी सिद्धांत 'सेपरेशन ऑफ पावर्स' है, जो विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका को एक-दूसरे से स्वतंत्र रखता है। आलोचकों और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि यदि जज अभी किसी बिल पर अपनी राय देते हैं, तो भविष्य में उसी कानून को चुनौती मिलने पर उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं। ऐसे में न्यायपालिका की भूमिका एक तटस्थ मध्यस्थ की होनी चाहिए, न कि कानून बनाने की प्रक्रिया में भागीदार की।

क्या है आगे का रास्ता?

समिति के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी ने औपचारिक रूप से इसे समय की कमी बताया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे संस्थागत टकराव को टालने के कदम के रूप में देखा जा रहा है। निवेशकों के लिए यह एक संकेत है कि भारत में बड़े सुधारों के रास्ते में संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाएं कितनी जटिल होती हैं। हालांकि इसका सीधा असर स्टॉक मार्केट पर नहीं है, लेकिन देश में नीतिगत स्थिरता और स्पष्ट प्रशासनिक ढांचा लंबे समय के आर्थिक नियोजन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बना रहेगा।

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