Orissa High Court ने एक महत्वपूर्ण फैसले में 86 वर्षीय पिता के पक्ष में आदेश दिया है। कोर्ट ने Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007 का हवाला देते हुए बेटे को पुश्तैनी घर की निचली मंजिल खाली करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट का रुख और कानून की अहमियत
Orissa High Court ने एक 86 वर्षीय रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए उनके बेटे को पुश्तैनी घर का हिस्सा खाली करने को कहा है। कोर्ट ने साफ किया कि 'Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007' का मुख्य उद्देश्य बुजुर्गों को सम्मान के साथ जीने का अधिकार देना है। इस फैसले के जरिए कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि घर में बुजुर्गों की सुरक्षा और गरिमा किसी भी अन्य विवाद से ऊपर है।
मालिकाना हक पर कोर्ट की स्पष्टीकरण
हालांकि कोर्ट ने बुजुर्ग पिता को घर में रहने का अधिकार तो दे दिया है, लेकिन प्रॉपर्टी के मालिकाना हक को लेकर चल रहे विवाद पर कोर्ट ने हस्तक्षेप नहीं किया है। पिता ने पारिवारिक संबंधों के दौरान जमीन के कई टाइटल बेटे के नाम ट्रांसफर कर दिए थे, जिन्हें अब वे वापस पाना चाहते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि सीनियर सिटीजन्स एक्ट प्रॉपर्टी के मालिकाना हक या टाइटल से जुड़े जटिल विवादों को सुलझाने के लिए नहीं है। ऐसे मामलों के लिए पीड़ित पक्ष को उचित सिविल कोर्ट की प्रक्रिया का पालन करना होगा।
यह मामला पूरी तरह से एक पारिवारिक कानूनी विवाद है और इसका शेयर बाजार, कॉर्पोरेट प्रदर्शन या किसी लिस्टेड कंपनी से कोई लेना-देना नहीं है।
