ओडिशा हाईकोर्ट ने पारादीप तट पर मई 2026 से फंसे टैंकर MT Unity के 23 क्रू मेंबर्स को तुरंत स्वदेश भेजने का आदेश दिया है। जहाज के मालिक द्वारा छोड़ दिए जाने के बाद पैदा हुए मानवीय संकट को देखते हुए अदालत ने यह सख्त कदम उठाया है।
ओडिशा हाईकोर्ट ने संघीय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे टैंकर MT Unity पर मौजूद 23 क्रू मेंबर्स को तुरंत सुरक्षित उतारें और उनकी स्वदेश वापसी सुनिश्चित करें। यह जहाज 11 मई, 2026 से पारादीप तट पर खड़ा है और इसके मालिक FMTC Ship Charter LLC के साथ कानूनी विवाद के चलते क्रू मेंबर्स राशन और वेतन जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे थे।
मानवीय आधार पर फैसला
जस्टिस आर.के. पटनायक ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मानव गरिमा की सुरक्षा भारतीय जलक्षेत्र में मौजूद विदेशी नागरिकों पर भी लागू होती है। अदालत ने अधिकारियों को 3 हफ्ते के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया है। हालांकि इंश्योरेंस कंपनी ने बकाया वेतन और अन्य खर्चों का भुगतान कर मानवीय संकट को कम करने की कोशिश की है, लेकिन जहाज अभी भी कानूनी दांव-पेच में फंसा हुआ है।
कानूनी और ऑपरेशनल मुश्किलें
MT Unity फिलहाल कोर्ट की निगरानी में है। जहाजरानी बिलों और ईंधन के बकाये को लेकर कई एडमिरल्टी मुकदमे चल रहे हैं। पारादीप पोर्ट अथॉरिटी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इस जहाज का रखरखाव करने की है। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि एक नया क्रू नियुक्त किया जाए जो जहाज को सुरक्षित रखे, क्योंकि यह जहाज व्यावसायिक दावों के लिए एक 'सिक्योरिटी' के तौर पर खड़ा है।
मैरीटाइम सेक्टर में वित्तीय जोखिम
यह मामला शिपिंग सेक्टर के उन छिपे हुए जोखिमों को उजागर करता है, जहां जहाज मालिक द्वारा हाथ खड़े कर देने पर सारा बोझ स्थानीय प्रशासन पर आ जाता है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि रिपेट्रिएशन (repatriation) और नए क्रू की नियुक्ति का खर्च जहाज के मालिक से ही वसूला जाएगा। निवेशकों और लॉजिस्टिक्स से जुड़े लोगों के लिए यह मामला एक चेतावनी है कि कैसे कानूनी पेच और जहाज की जब्ती बंदरगाहों पर कामकाज को ठप कर सकती है और लंबे समय तक वित्तीय नुकसान का कारण बन सकती है।
