विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेंद्र कुमार के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आरोप है कि 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) के दौरान लाखों मतदाताओं के नाम सिस्टम से गलत तरीके से हटा दिए गए हैं, जिसे लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी मतभेद सामने आए हैं।
विपक्ष, जिसका नेतृत्व कांग्रेस पार्टी कर रही है, अब मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेंद्र कुमार के खिलाफ महाभियोग (Impeachment) का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। यह कदम 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) के नाम पर हुए उस अभियान के बाद उठाया गया है, जिसे लेकर विपक्ष का आरोप है कि इसके जरिए लाखों वैध मतदाताओं के नाम सिस्टम से हटा दिए गए।
विवाद की जड़: ECINet और डेटा सुरक्षा
पूरे विवाद के केंद्र में 'ECINet' सिस्टम है, जो मतदाताओं के डेटा का मुख्य आधार है। विपक्षी दलों का कहना है कि इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (ERO) द्वारा उपयोग किए जाने वाले सॉफ्टवेयर में गलतियों को सुधारने की सुविधा न के बराबर है। कांग्रेस ने अपने 'वोट बचाओ, देश बचाओ' अभियान के जरिए दावा किया है कि इस तकनीकी खामी से लाखों प्रविष्टियों का हटाना आने वाले चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है।
चुनाव आयोग के भीतर की दरारें
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब चुनाव आयोग के तीन सदस्यों के बीच आंतरिक मतभेद खुलकर सामने आए। रिकॉर्ड्स बताते हैं कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कम से कम 14 मौकों पर आधिकारिक रूप से असहमति दर्ज कराई है। यह असहमति मुख्य रूप से SIR प्रक्रिया, फॉर्म-6 हैंडलिंग और आईटी सिस्टम के केंद्रीकरण को लेकर रही है।
सुप्रीम कोर्ट और कानूनी चुनौतियां
विपक्ष अब सुप्रीम कोर्ट की शरण में है और आयोग की आंतरिक बैठकों के मिनट्स और नोटिंग्स को सार्वजनिक करने की मांग कर रहा है। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है और इसे राजनीतिक साजिश बताया है। इस मामले में मुख्य कानूनी बाधा 'मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023' की धारा 16 है, जो आयुक्तों को उनके आधिकारिक कर्तव्यों के लिए कानूनी सुरक्षा प्रदान करती है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट इस धारा की संवैधानिकता की समीक्षा कर रहा है, और अब सबकी नजरें कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
