Natco Pharma ने Novartis की ब्रेस्ट कैंसर दवा, ribociclib, के दूसरे पेटेंट को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। Natco का आरोप है कि यह पेटेंट Novartis के लिए **2029** तक एकाधिकार (monopoly) को गैर-कानूनी तरीके से बढ़ा रहा है। यह कानूनी लड़ाई Natco के लिए अहम है, जो जेनेरिक प्रतिस्पर्धा, एक्सपोर्ट से जुड़े जोखिमों और हालिया तिमाही में मुनाफे में आई गिरावट से जूझ रही है।
पेटेंट पर छिड़ा विवाद
Natco Pharma ने भारतीय पेटेंट कार्यालय (Indian Patent Office) के Novartis की ब्रेस्ट कैंसर दवा, ribociclib (जिसे Kisqali के नाम से बेचा जाता है), के लिए दूसरे पेटेंट को मंजूरी देने के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। हैदराबाद स्थित इस दवा निर्माता कंपनी का तर्क है कि 10 जुलाई, 2026 को दिया गया यह नया पेटेंट Novartis के बाज़ार एकाधिकार को 2029 तक गैर-कानूनी रूप से बढ़ाता है।
Natco की याचिका में कहा गया है कि ribociclib पहले से ही एक मौजूदा भारतीय पेटेंट (IN 283133) के तहत सुरक्षित है, जिसकी वैधता मई 2027 तक है। दूसरे पेटेंट को हासिल करके, Natco का आरोप है कि Novartis प्रभावी रूप से भारतीय बाज़ार में इस दवा के जेनेरिक संस्करणों (generic versions) के प्रवेश में देरी कर रही है। जस्टिस अनूप जयराम भंभानी, जिन्होंने इस मामले को संक्षिप्त में सुना, ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर दिया है, और आगे की सुनवाई 16 सितंबर, 2026 को निर्धारित है।
Natco Pharma के लिए क्यों अहम है यह लड़ाई?
यह कानूनी टकराव Natco Pharma के लिए एक चुनौतीपूर्ण समय पर आया है। कंपनी ने हाल ही में 2026 के फाइनेंशियल ईयर की चौथी तिमाही में अपने कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में साल-दर-साल 34% की गिरावट दर्ज की थी, जो ₹270 करोड़ रहा। कंपनी के शेयर फिलहाल ₹918–₹921 के आसपास कारोबार कर रहे हैं, जो निवेशकों के सतर्क रुख को दर्शाता है, क्योंकि वे कंपनी की विकास की संभावनाओं को मौजूदा वित्तीय दबावों के मुकाबले तौल रहे हैं।
Natco के लिए, उच्च-मूल्य वाले जेनेरिक उत्पादों को लॉन्च करने की क्षमता उसकी विकास रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालांकि, जेनेरिक फार्मास्युटिकल सेक्टर वर्तमान में कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। पेटेंट मुकदमेबाजी के अलावा, जेनेरिक दवाओं के आयात पर संभावित अमेरिकी टैरिफ को लेकर भी उद्योग में चिंताएं हैं, जो कंपनी के एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अतिरिक्त, Natco अपने प्रमुख एक्सपोर्ट बाजारों में तीव्र मूल्य प्रतिस्पर्धा का सामना करना जारी रखे हुए है, जो बढ़ते परिचालन लागत के साथ मिलकर आय में अस्थिरता का कारण बना है।
निवेशक और बाज़ार विश्लेषक इस कानूनी विवाद पर कड़ी नज़र रख रहे हैं, क्योंकि यह सीधे तौर पर Natco द्वारा दवा के अपने संस्करण को व्यावसायिक रूप से कब लॉन्च किया जा सकता है, इसकी समय-सीमा को प्रभावित करता है। कंपनी का शुरुआती बाज़ार पहुंच सुरक्षित करने के लिए इस तरह की पेटेंट चुनौतियों में शामिल होने का इतिहास रहा है, लेकिन इन मामलों का परिणाम अनिश्चित बना हुआ है। भविष्य में, शेयरधारकों के लिए 16 सितंबर की सुनवाई के नतीजे और कंपनी की इन नियामक और पेटेंट-संबंधी बाधाओं से निपटने की क्षमता पर किसी भी आगे के अपडेट पर नज़र रखना महत्वपूर्ण होगा।
