नंदीग्राम उपचुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार Milan Pradhan को **3 अक्टूबर** तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। **2007** के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े मामलों के कारण हुई इस गिरफ्तारी ने उनके चुनाव प्रचार को बुरी तरह प्रभावित किया है।
प्रचार के लिए बचा बेहद कम समय
हल्दिया कोर्ट के इस फैसले ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति को तगड़ा झटका दिया है। चूँकि 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं, मिलन प्रधान की हिरासत का मतलब है कि प्रचार के लिए उनके पास न के बराबर समय बचा है। यदि उनकी कानूनी टीम को ऊपरी अदालत से राहत नहीं मिलती है, तो उनके पास प्रचार करने के लिए बमुश्किल 1 दिन का समय बचेगा।
क्या है पूरा मामला?
यह कार्रवाई 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े पुराने लंबित मामलों के कारण हुई है। पुलिस के अनुसार, उन पर दंगा करने, हत्या का प्रयास और 'आर्म्स एक्ट' जैसी गंभीर धाराओं में मामले दर्ज हैं। प्रशासन का कहना है कि यह गिरफ्तारी पहले से जारी गैर-जमानती वारंट के आधार पर हुई है, जबकि प्रधान के वकील इसे कानूनी रूप से चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।
सियासी संग्राम और आरोप-प्रत्यारोप
इस गिरफ्तारी ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने हाल ही में अपने उम्मीदवार को हटाकर कांग्रेस को समर्थन देने का फैसला किया था, ताकि BJP के खिलाफ गठबंधन मजबूत हो सके। जहाँ एक ओर कांग्रेस इस कार्रवाई की टाइमिंग पर सवाल उठा रही है, वहीं BJP इसे कानून की सामान्य प्रक्रिया बताकर पल्ला झाड़ रही है। अब कांग्रेस पार्टी अपने कार्यकर्ताओं के दम पर धरातल पर चुनाव प्रचार जारी रखने की योजना बना रही है।
