National Investigation Agency (NIA) ने एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ अवैध तरीके से भारत में प्रवेश और मूवमेंट को लेकर चार्जशीट दाखिल की है। फिलहाल यह कार्रवाई इमिग्रेशन एक्ट के तहत की गई है, जबकि म्यांमार में ड्रोन ट्रेनिंग देने के आरोपों पर UAPA के तहत जांच अभी भी जारी है।
National Investigation Agency (NIA) ने 8 सितंबर 2026 को सात विदेशी नागरिकों के खिलाफ औपचारिक रूप से चार्जशीट फाइल कर दी है। इन आरोपियों में एक अमेरिकी नागरिक मैथ्यू हारून वैन डाइक और छह यूक्रेनी नागरिक—हुरबा पेट्रो, स्लेवियाक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफनकीव मारियन, होंचारुक मैक्सिम और कामिंस्की विक्टर शामिल हैं।
कानूनी मजबूरी और अगली प्रक्रिया
NIA ने यह कदम Immigration and Foreigners Act, 2025 की धारा 21 और 23 के तहत उठाया है। कानूनी प्रक्रिया के मुताबिक, 180 दिन की हिरासत अवधि पूरी होने के बाद चार्जशीट दाखिल करना अनिवार्य था। इन सभी को मार्च 2026 में देश के अलग-अलग हवाई अड्डों से गिरफ्तार किया गया था।
हालांकि फिलहाल चार्जशीट इमिग्रेशन उल्लंघन पर केंद्रित है, लेकिन एजेंसी ने साफ किया है कि Unlawful Activities (Prevention) Act (UAPA) के तहत मुख्य जांच अभी खत्म नहीं हुई है। गंभीर आरोपों को सप्लीमेंट्री चार्जशीट के लिए सुरक्षित रखा गया है, ताकि जांचकर्ताओं को सबूत जुटाने के लिए अधिक समय मिल सके।
म्यांमार कनेक्शन का खुलासा
जांच एजेंसियों का आरोप है कि ये सातों लोग दिसंबर 2025 में बिना वैध परमिट के भारत आए थे। इसके बाद ये मिजोरम के रास्ते म्यांमार के 'विक्टोरिया कैंप' पहुंचे। आरोप है कि इन्होंने वहां चीन नेशनल फ्रंट और कचिन इंडिपेंडेंस आर्मी जैसे सशस्त्र समूहों को ड्रोन असेंबली और जैमिंग टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग दी थी।
सुरक्षा स्थिति और आगे क्या?
10 सितंबर 2026 तक की स्थिति के अनुसार, NIA को फिलहाल किसी 'एंटी-इंडिया' साजिश या भारत के विद्रोही गुटों के साथ सीधे जुड़ाव के पक्के सबूत नहीं मिले हैं। एजेंसी अभी आरोपियों के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और डेटा का विश्लेषण कर रही है। अब मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर 2026 को होनी है, जिसके बाद ही तय होगा कि क्या इन पर UAPA की धाराओं के तहत और कड़े आरोप लगाए जाएंगे।
